बांग्लादेश: कपड़ा उद्योग में क्यों घट रही है महिलाओं की हिस्सेदारी, जो कभी सशक्तीकरण का प्रतीक था
कभी बांग्लादेश में महिला आर्थिक सशक्तीकरण की सबसे बड़ी सफल कहानियों में गिना जाने वाला रेडीमेड गारमेंट (RMG) उद्योग अब एक चिंताजनक बदलाव देख रहा है। इस सेक्टर में, जिसने लाखों महिलाओं को रोजगार देकर…
कभी बांग्लादेश में महिला आर्थिक सशक्तीकरण की सबसे बड़ी सफल कहानियों में गिना जाने वाला रेडीमेड गारमेंट (RMG) उद्योग अब एक चिंताजनक बदलाव देख रहा है। इस सेक्टर में, जिसने लाखों महिलाओं को रोजगार देकर उनकी और देश की अर्थव्यवस्था को बदला था, अब बड़े पैमाने पर महिला कर्मचारियों की छंटनी हो रही है। समाचार एजेंसी IANS ने ढाका से प्रकाशित 'द डेली स्टार' की एक रिपोर्ट के हवाले से यह जानकारी दी है।
आंकड़े इस गिरावट की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (बीजीएमईए) के अनुसार, 1980 से 1994 के बीच इस उद्योग में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 80 प्रतिशत थी। यह आंकड़ा 2005 तक घटकर 70 फीसदी और 2021-2023 में और कम होकर करीब 53 फीसदी पर आ गया। इस गिरावट की पुष्टि एथिकल ट्रेडिंग इनिशिएटिव (ईटीआई), जीआईजेड, ब्रैक यूनिवर्सिटी और बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज (बीआईडीएस) के अध्ययनों में भी की गई है।
ऑटोमेशन और कौशल का अंतर
रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं की घटती भागीदारी के पीछे कई अहम कारण हैं। इनमें सबसे प्रमुख है ऑटोमेशन यानी नई मशीनों का बढ़ता इस्तेमाल। इन आधुनिक मशीनों को चलाने के लिए तकनीकी कौशल की जरूरत होती है, जिसका प्रशिक्षण कई महिला कर्मचारियों के पास नहीं है। इसके विपरीत, पुरुष कर्मचारी ओवरलॉक, फ्लैटलॉक और बटनहोल जैसी कई स्वचालित मशीनें चलाने में सक्षम पाए गए हैं, जिससे उनकी मांग बढ़ रही है। '2022 एफएसजी' रिपोर्ट के अनुसार, लगभग एक तिहाई महिला कर्मचारियों ने प्राथमिक शिक्षा भी पूरी नहीं की है, जबकि पुरुष कर्मचारियों में यह अनुपात 18 फीसदी है।
सुरक्षा चिंताएं और मुश्किल हालात
एक और बड़ी वजह चौबीसों घंटे चलने वाली उत्पादन इकाइयों में रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) है। सुरक्षा चिंताओं के कारण नियोक्ता रात की शिफ्ट के लिए महिलाओं की जगह पुरुष कर्मचारियों को प्राथमिकता देते हैं। इसके अलावा, उद्योग में काम करने के मुश्किल हालात भी महिलाओं को बाहर धकेल रहे हैं। रिपोर्ट में 12 घंटे की लंबी शिफ्ट, कम ब्रेक, गर्म और भीड़भाड़ वाली जगहों का जिक्र है, जिससे कर्मचारियों को सिरदर्द, सांस की दिक्कतें और त्वचा की एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, जो किसी हेल्थ इंश्योरेंस में कवर नहीं हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बुजुर्ग महिलाएं, खासकर जिनके बच्चे हैं, वे फैक्ट्रियों के पास रहने की कठिन परिस्थितियों के कारण हार मानकर अपने गांव लौट रही हैं।
उत्पीड़न और भेदभाव
कार्यस्थल पर होने वाला व्यवहार भी एक बड़ा कारक है। रिपोर्ट के अनुसार, सुपरवाइजरों द्वारा गाली-गलौज आम बात है और "लगातार उत्पीड़न से महिलाओं के लिए काम जारी रखना मुश्किल हो जाता है।" इसमें बताया गया है कि 80 फीसदी महिला श्रमिकों ने काम पर यौन हिंसा या उत्पीड़न का अनुभव किया है या देखा है। इसके साथ ही, लैंगिक पूर्वाग्रह भी उनकी तरक्की में बाधक है। महिलाएं सुपरवाइजरी भूमिकाओं में 15 प्रतिशत से भी कम और प्रबंधकीय पदों पर 5 प्रतिशत से भी कम हैं, जो इस आम धारणा को दर्शाता है कि पुरुष तेजी से काम करते हैं।
गारमेंट्स श्रमिक यूनिटी फोरम की अध्यक्ष मोशरेफा मिशु के हवाले से कहा गया कि उद्योग के विकास के हिसाब से श्रमिकों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है और महिलाएं इसकी रीढ़ होने के बावजूद सबसे कम वेतन पाने वालों में से हैं।
इनपुट: IANS



