अभिषेक बनर्जी ने बैंक खाता फ्रीज होने पर खटखटाया कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाज़ा, सुनवाई 19 अगस्त को
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने बैंक खाते को फ्रीज किए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। यह कार्रवाई उनकी अमेरिका यात्रा से ठीक पहले हुई है, जहां उन्हें आंखों…
तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने बैंक खाते को फ्रीज किए जाने के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया है। यह कार्रवाई उनकी अमेरिका यात्रा से ठीक पहले हुई है, जहां उन्हें आंखों का इलाज कराना है। बनर्जी के वकील ने सोमवार को न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ के समक्ष याचिका दायर कर इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग की है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, याचिका में कहा गया है कि बनर्जी के बैंक खाते पर अचानक डेबिट संबंधी प्रतिबंध लगा दिए गए हैं और बैंक अधिकारियों ने इसका कोई कारण नहीं बताया है। यह कदम तब उठाया गया है जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उन्हें इलाज के लिए विदेश जाने की अनुमति दी थी। अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर से लोकसभा सांसद हैं।
प्रक्रिया पर उठाए गए सवाल
अभिषेक बनर्जी के वकील अयान भट्टाचार्य ने अदालत में दलील दी कि बैंक अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 107 को लागू किए बिना किसी का खाता कैसे फ्रीज किया जा सकता है। वकील ने बताया कि इस धारा के तहत, पुलिस को खाता फ्रीज करने से पहले संबंधित मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करना होता है, जो इस मामले में नहीं किया गया।
कोर्ट का आदेश और अगली सुनवाई
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राव ने पूछा कि क्या अभिषेक के खिलाफ कोई जांच चल रही है। इस पर उनके वकील ने जवाब दिया कि उनके मुवक्किल अदालत के आदेशों के अनुसार जांच में सहयोग कर रहे हैं, लेकिन इसका बैंक खाता फ्रीज करने से कोई संबंध नहीं है। याचिका स्वीकार करते हुए, न्यायमूर्ति राव ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। इस मामले पर अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन-सदस्यीय पीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए अभिषेक बनर्जी को तीन सप्ताह के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दी थी। यह अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी गई थी, जिसमें डिप्लोमेटिक पासपोर्ट पर यात्रा करना और जांच एजेंसी को यात्रा कार्यक्रम की पूरी जानकारी देना शामिल है।
इनपुट: IANS



