मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

हनी-ट्रैप का नया मनोवैज्ञानिक पैंतरा: ISI की भारतीय अधिकारियों को फँसाने की बदली हुई रणनीति

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अब भारतीय अधिकारियों को हनी-ट्रैप में फँसाने के लिए एक नया और ज़्यादा खतरनाक तरीका अपना रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ISI अब पैसे या धमकी की बजाय…

हनी-ट्रैप का नया मनोवैज्ञानिक पैंतरा: ISI की भारतीय अधिकारियों को फँसाने की बदली हुई रणनीति
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI अब भारतीय अधिकारियों को हनी-ट्रैप में फँसाने के लिए एक नया और ज़्यादा खतरनाक तरीका अपना रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ISI अब पैसे या धमकी की बजाय मनोवैज्ञानिकों की मदद से उन अधिकारियों को निशाना बना रही है, जिनके पास संवेदनशील जानकारी होती है। ये मनोवैज्ञानिक सोशल मीडिया पर ऐसे अधिकारियों की पहचान कर उनकी निजी कमजोरियों का फायदा उठाते हैं।

विज्ञापन

रिपोर्ट में एक इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि यह ISI की कार्यप्रणाली में एक बड़ा बदलाव है। पहले हनी-ट्रैप नेटवर्क पैसों का लालच या डराने-धमकाने जैसे तरीकों पर निर्भर करते थे। लेकिन अब, रणनीति बदलकर अधिकारियों की निजी समस्याओं और भावनात्मक कमजोरियों का फायदा उठाने पर केंद्रित हो गई है, जहाँ मनोवैज्ञानिक अहम भूमिका निभा रहे हैं।

मनोवैज्ञानिक कैसे बनाते हैं निशाना?

ISI द्वारा नियुक्त किए गए ये प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक सबसे पहले सोशल मीडिया पर सक्रिय अधिकारियों की पहचान करते हैं। वे उनके द्वारा पोस्ट किए गए संदेशों का गहराई से अध्ययन कर उनकी मानसिकता और निजी समस्याओं को समझने की कोशिश करते हैं। एक बार जब कोई कमजोर अधिकारी मिल जाता है, तो ये मनोवैज्ञानिक महिलाओं के फर्जी प्रोफाइल से उनसे बातचीत शुरू करते हैं।

शुरुआत में वे अधिकारी के प्रति गहरी सहानुभूति जताते हैं और उनकी समस्याओं को सुनते हैं। इस प्रक्रिया में अधिकारी का भरोसा जीतने में उन्हें लगभग दो से तीन महीने लग जाते हैं। इस दौरान वे उनकी कमजोरियों को अच्छी तरह समझ लेते हैं।

भरोसा जीतने के बाद का खेल

एक बार जब अधिकारी पूरी तरह भरोसे में आ जाता है, तो उसे अपने सिस्टम पर कुछ एप्लिकेशन इंस्टॉल करने के लिए कहा जाता है। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से ज़्यादातर एप्लिकेशन चीन में बने स्पाइवेयर या मैलवेयर होते हैं, जो चुपके से डिवाइस से डेटा चुरा लेते हैं। व्यक्ति को इसका एहसास भी नहीं होता और वह डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों के माध्यम से संवेदनशील जानकारी साझा कर बैठता है।

यह तरीका ISI के लिए काफी कारगर साबित हो रहा है, क्योंकि निराश या निजी समस्याओं से जूझ रहे अधिकारी अक्सर अपनी भड़ास निकालने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। इस रणनीति की सफलता के कारण पाकिस्तान में ऐसे मनोवैज्ञानिकों की माँग बढ़ गई है। भारतीय एजेंसियों के लिए यह एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि लगातार चेतावनियों के बावजूद कई अधिकारी इस जाल में फँस रहे हैं।

इनपुट: IANS

N

News4Social राजनीति डेस्क

News4Social राजनीति डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से राजनीति और चुनाव से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →