मंगलवार, 28 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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पश्चिम बंगाल: ग्रामीण प्रशासन में बड़ा फेरबदल, 99 BDO का एक साथ तबादला

पश्चिम बंगाल में सरकार ने ग्रामीण प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए 99 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (BDO) का एक साथ तबादला कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के कार्मिक और प्रशासनिक…

पश्चिम बंगाल: ग्रामीण प्रशासन में बड़ा फेरबदल, 99 BDO का एक साथ तबादला
(फोटो: IANS)

पश्चिम बंगाल में सरकार ने ग्रामीण प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करते हुए 99 ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स (BDO) का एक साथ तबादला कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य के कार्मिक और प्रशासनिक सुधार विभाग ने मंगलवार को यह आदेश जारी किया। इस फेरबदल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को और सुचारू बनाना है।

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यह फेरबदल ऐसे समय में हुआ है जब ग्रामीण प्रशासन से जुड़ी कुछ चुनौतियां सामने आ रही हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से कई त्रि-स्तरीय पंचायत निकायों के तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख और उप-प्रमुख अपने कार्यालयों में नहीं आ रहे हैं, जिससे ग्रामीण नागरिक सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

युवा अधिकारियों पर सरकार का जोर

इस बड़े फेरबदल में एक खास बात यह है कि ज्यादातर युवा अधिकारियों को BDO के रूप में नई तैनाती दी गई है। मिली जानकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (WBCS) के 2018 से 2025 के बीच के बैच के अधिकारियों को प्राथमिकता दी गई है। राज्य सचिवालय के एक अधिकारी ने उम्मीद जताई कि युवा प्रशासकों की तैनाती से ग्रामीण विकास की गति तेज होगी।

उल्लेखनीय है कि मई में नई सरकार के गठन के बाद से ही राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर कई बदलाव देखने को मिले हैं। अब यह फेरबदल ब्लॉक स्तर पर किया गया है, जो किसी भी राज्य में ग्रामीण प्रशासन की रीढ़ माना जाता है।

पंचायत व्यवस्था में पारदर्शिता का प्रयास

प्रशासनिक फेरबदल के साथ-साथ सरकार ने हाल ही में पंचायत व्यवस्था में भी सुधार की पहल की है। पिछले हफ्ते ही विधानसभा में पश्चिम बंगाल पंचायत (दूसरा संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया गया था। इसका मकसद 1973 के पुराने पंचायत अधिनियम में बदलाव कर पारदर्शिता, दक्षता और गति लाना है।

नए कानून के तहत, पंचायत के तीनों स्तरों पर निर्वाचित प्रमुखों के वित्तीय बिल पास करने के अधिकार को सीमित कर दिया गया है। पंचायत मामलों और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने सदन में बताया था, "इसका उद्देश्य निर्वाचित पंचायत प्रमुखों की संवैधानिक शक्तियों को कम करना नहीं है, बल्कि ग्रामीण नागरिक सेवाओं से जुड़े भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की गुंजाइश को खत्म करना है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि अब से निर्वाचित प्रमुख सिर्फ प्रस्ताव को मंजूरी देंगे, जबकि बिल की राशि को नौकरशाहों द्वारा पास किया जाएगा।

इनपुट: IANS

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News4Social पश्चिम बंगाल डेस्क

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