यूरोप के बाज़ारों तक पहुँची त्रिपुरा की चाय, 15 हज़ार किलो की अब तक की सबसे बड़ी खेप रवाना
त्रिपुरा के चाय उद्योग ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए यूरोप के बाज़ारों में अपनी दस्तक दे दी है। शुक्रवार को राज्य से 15.31 मीट्रिक टन (यानी 15,310 किलोग्राम) चाय की एक बड़ी खेप यूरोपीय देशों के…
त्रिपुरा के चाय उद्योग ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए यूरोप के बाज़ारों में अपनी दस्तक दे दी है। शुक्रवार को राज्य से 15.31 मीट्रिक टन (यानी 15,310 किलोग्राम) चाय की एक बड़ी खेप यूरोपीय देशों के लिए रवाना की गई। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह त्रिपुरा चाय विकास निगम लिमिटेड (TTDCL) द्वारा अब तक भेजा गया सबसे बड़ा सिंगल शिपमेंट है, जो राज्य के चाय सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
यह उच्च-गुणवत्ता वाली चाय की खेप पश्चिम त्रिपुरा के दुर्गाबाड़ी स्थित सेंट्रल टी प्रोसेसिंग फैक्ट्री से भेजी गई। उद्योग और वाणिज्य सचिव किरण गिट्टे, TTDCL के चेयरमैन समीर रंजन घोष और प्रबंध निदेशक राजेश कुमार दास ने इस कंसाइनमेंट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह शिपमेंट कोलकाता के रास्ते यूरोप भेजा जाएगा।
बढ़ता कारोबार और नई उम्मीदें
TTDCL के चेयरमैन समीर रंजन घोष ने इस उपलब्धि को त्रिपुरा की चाय को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार तक पहुँचाने की कोशिशों में एक अहम पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय चाय उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और वैश्विक चाय बाज़ार में राज्य की स्थिति मज़बूत होगी। यह खेप निगम के पिछले सबसे बड़े शिपमेंट से लगभग दोगुनी है, जो इसी साल 8,200 किलोग्राम चाय का था और गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र भेजा गया था।
अगरतला में बनेगा अपना ऑक्शन सेंटर
त्रिपुरा सरकार अब राज्य में ही एक चाय नीलामी केंद्र (Tea Auction Center) स्थापित करने की तैयारी कर रही है। घोष के अनुसार, इस केंद्र का मकसद चाय उत्पादकों और निर्माताओं को बेहतर कीमत और मार्केटिंग की सुविधा देना है। इस प्रस्तावित केंद्र से एक ऐसा कॉमन डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार होगा, जहाँ उत्पादक, निर्माता, ब्रोकर, खरीदार और वेयरहाउस जैसे सभी हितधारक एक साथ आ सकेंगे। उम्मीद है कि इलेक्ट्रॉनिक बोली और ज़्यादा खरीदारों की भागीदारी से चाय की अच्छी कीमत मिल सकेगी। अधिकारियों का अनुमान है कि इससे माल ढुलाई, वेयरहाउसिंग और सैंपलिंग जैसे खर्चों में भी कमी आएगी, जिससे प्रति किलोग्राम लगभग 6-10 रुपये की बचत हो सकती है।
त्रिपुरा का चाय उद्योग: एक नज़र
त्रिपुरा में दशकों से चाय उत्पादन की बड़ी क्षमता रही है, लेकिन ब्रांडिंग, मार्केटिंग और बड़े बाज़ारों तक पहुँच जैसी चुनौतियाँ हमेशा बनी रहीं। सरकार का लक्ष्य अब राज्य को सिर्फ एक चाय उत्पादक से आगे बढ़ाकर पूर्वोत्तर भारत में चाय व्यापार का एक बड़ा केंद्र बनाना है।
कुछ अहम तथ्य:
- राज्य में कुल 54 बड़े चाय बागान हैं, जिनमें सरकारी और निजी दोनों शामिल हैं।
- लगभग 2,800 छोटे चाय उत्पादक कुल उत्पादन में करीब 30% का योगदान देते हैं।
- त्रिपुरा में सालाना लगभग 90 लाख किलोग्राम चाय का उत्पादन होता है।
- अभी 60% से ज़्यादा उत्पादन राज्य के बाहर नीलामी बाज़ारों में बेचा जाता है।
इसके अलावा, 'त्रिपुरेश्वरी चाय' को स्थानीय राशन की दुकानों के ज़रिए भी वितरित किया जा रहा है, ताकि स्थानीय उत्पादों की पहुँच आम लोगों तक बढ़ सके। उम्मीद है कि अगले साल तक त्रिपुरा में अपना नीलामी केंद्र शुरू हो जाएगा, जिससे इस उद्योग को और रफ़्तार मिलेगी।
इनपुट: IANS



