शनिवार, 12 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बलूचिस्तान में दमन का नया दौर: अब पाकिस्तानी अधिकारियों के सीधे निशाने पर आईं महिलाएं

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में असंतोष को दबाने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक जबरन गायब किए जाने वाले…

बलूचिस्तान में दमन का नया दौर: अब पाकिस्तानी अधिकारियों के सीधे निशाने पर आईं महिलाएं
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में असंतोष को दबाने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों में एक चिंताजनक बदलाव देखने को मिल रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब तक जबरन गायब किए जाने वाले मामलों में मुख्य रूप से पुरुषों को निशाना बनाया जाता था, लेकिन अब महिलाएं भी सीधे तौर पर सरकारी कार्रवाई का शिकार बन रही हैं। यह घटनाक्रम प्रांत में पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा दमन के बढ़ते दायरे की ओर इशारा करता है।

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साउथ एशिया टेररिज्म पोर्टल (SATP) की रिपोर्ट बताती है कि 2025 के बाद से इस चलन में तेज़ी आई है। पहले, पुरुषों के गायब होने का सामाजिक, आर्थिक और मानसिक खामियाजा महिलाएं भुगतती थीं, लेकिन अब वे स्वयं इस दमन का प्रत्यक्ष निशाना हैं।

हिरासत, दबाव और 'कबूलनामे' का पैटर्न

रिपोर्ट के मुताबिक, असहमति पर काबू पाने के लिए सरकार जबरन जुर्म कबूल करवाने का तरीका अपना रही है। महिलाओं को पहले बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के लंबे समय तक हिरासत में रखा जाता है और फिर दबाव या दुर्व्यवहार के जरिए ऐसे अपराधों को 'कबूल' करने के लिए मजबूर किया जाता है, जिनसे वे हमेशा इनकार करती आई हैं।

इसका एक प्रमुख उदाहरण महल बलूच का मामला है। फरवरी 2023 में, काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (CTD) ने क्वेटा स्थित उनके घर पर देर रात छापा मारकर उन्हें हिरासत में ले लिया। बाद में अधिकारियों ने दावा किया कि उन्हें विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया गया और उन पर आत्मघाती हमले समेत उग्रवादी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। 55 दिनों की फिजिकल रिमांड के बावजूद, अधिकारी कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। हालांकि, बाद में एक वीडियो सामने आया, जिसमें वह पुलिस हिरासत में रहते हुए इन गतिविधियों में शामिल होने की बात 'कबूल' करती दिखीं।

विरोध की मुखर आवाज़ बनती महिलाएं

रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ महिलाओं के विद्रोही समूहों में शामिल होने और फिदायीन हमलों को अंजाम देने के कारण सरकार ने अपनी दशकों पुरानी 'जबरन गायब करने' की रणनीति को महिलाओं पर भी लागू कर दिया है।

हालांकि, यह भी बताया गया है कि विद्रोही हमलों में शामिल महिलाओं की संख्या बहुत कम है। इसके विपरीत, पिछले एक दशक में बलूच महिलाएं अहिंसक राजनीतिक सक्रियता में एक प्रमुख आवाज़ बनकर उभरी हैं, विशेषकर जबरन गुमशुदगी और गैर-न्यायिक हत्याओं के खिलाफ। उन्होंने लापता रिश्तेदारों के लिए लंबे विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है। सैकड़ों महिलाओं ने तुर्बत से इस्लामाबाद तक लगभग 1,000 मील की पदयात्रा की और इस्लामाबाद प्रेस क्लब के बाहर धरना दिया, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा।

न्याय की लड़ाई में महिलाओं की बढ़ती भूमिका

बलूच यकजेहती कमेटी (BYC) की नेता सम्मी दीन बलूच ने पिछले साल 'अरब न्यूज़' को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि पुरुषों के जबरन गायब किए जाने की बढ़ती घटनाओं ने महिलाओं को न्याय की लड़ाई में मुख्य भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है। SATP रिपोर्ट में उनके हवाले से कहा गया है, "हमने देखा कि हमारे पुरुषों, भाइयों और बेटों को सुनियोजित तरीके से उठाया गया... ऐसे हालात में, बलूच महिलाओं के पास यही एकमात्र विकल्प बचा था कि वे इस लड़ाई को खुद अपने हाथों में लें।"

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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