मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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वंदे मातरम विवाद: खरगे का सवाल- अगर हम अपराधी हैं, तो गांधी और वाजपेयी पर भी केस हो

कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस पर 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर उपजे विवाद पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में शिकाय…

वंदे मातरम विवाद: खरगे का सवाल- अगर हम अपराधी हैं, तो गांधी और वाजपेयी पर भी केस हो
(फोटो: IANS)

कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस पर 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर उपजे विवाद पर पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद खरगे ने मंगलवार को कहा कि अगर राष्ट्रगीत का पुराना संस्करण गाना अपराध है, तो महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पणजी में पत्रकारों से बात करते हुए खरगे ने कहा, “हमने वही वंदे मातरम गाया, जो महात्मा गांधी ने गाया था। हमने वही गाया जो जवाहरलाल नेहरू ने गाया था... यहां तक कि वाजपेयी सरकार के दौरान भी यही वंदे मातरम गाया गया था।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर यह अपराध है तो पिछले 18 वर्षों से वे (आलोचक) भी यही अपराध कर रहे हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद शनिवार को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय, इंदिरा भवन में शुरू हुआ। पार्टी अध्यक्ष द्वारा तिरंगा फहराने के बाद 'वंदे मातरम' का गायन शुरू हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले यह तय हुआ था कि राष्ट्रगीत की केवल पहली दो पंक्तियां ही गाई जाएंगी, लेकिन गायकों ने पूरा संस्करण गाना जारी रखा। बताया जा रहा है कि सोनिया गांधी ने इस पर ध्यान दिया और खरगे की ओर इशारा किया, जिसके बाद गायकों को रुकने के लिए कहा गया।

इसी घटना के आधार पर सोमवार को दिल्ली पुलिस में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने वंदे मातरम के गायन को बाधित करने का प्रयास किया और इस संबंध में FIR दर्ज करने की मांग की गई है।

"कांग्रेस ने तब प्रस्ताव पास किया था, जब आलोचक पैदा भी नहीं हुए تھے"

खरगे ने अपने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय गीतों को लेकर उस समय प्रस्ताव पारित किया था, जब आज के कई आलोचक पैदा भी नहीं हुए थे। उन्होंने सवाल किया, “आप जो कहेंगे, क्या वही होगा? आने वाले वर्षों में कोई दूसरी सरकार आएगी, तो क्या वह जो कहेगी, वही होगा?”

इस दौरान खरगे ने कुछ शैक्षणिक और अन्य संस्थाओं की वित्तीय सहायता रोकने के मुद्दे पर भी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि फंडिंग रोकना उचित नहीं है और अगर कोई गलती हुई है तो उसे सुधारा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर किसी को सबसे ज्यादा फंडिंग मिल रही है तो वह आरएसएस को ही मिल रही है।”

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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