बुधवार, 19 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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मतदान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, चुनाव आयोग ने बताया कैसे विशेष अभियान बने गेम-चेंजर

भारत के कई राज्यों में हुए चुनावों में मतदान प्रतिशत ने ऐतिहासिक स्तर को छुआ है, जो लोकतंत्र में बढ़ती जन-भागीदारी का एक मज़बूत संकेत है। चुनाव आयोग (ECI) का मानना है कि इस सकारात्मक बदलाव के पीछे…

मतदान में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, चुनाव आयोग ने बताया कैसे विशेष अभियान बने गेम-चेंजर
(फोटो: IANS)

भारत के कई राज्यों में हुए चुनावों में मतदान प्रतिशत ने ऐतिहासिक स्तर को छुआ है, जो लोकतंत्र में बढ़ती जन-भागीदारी का एक मज़बूत संकेत है। चुनाव आयोग (ECI) का मानना है कि इस सकारात्मक बदलाव के पीछे 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) जैसे अभियानों की अहम भूमिका है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन अभियानों के ज़रिए मतदाता सूचियों को लगातार अपडेट किया जाता है, जिससे चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ी है।

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आयोग द्वारा जारी आंकड़े स्वतंत्रता के बाद से अब तक की एक दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं। पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जहां 1951 में मतदान सिर्फ़ 40% था, वह 2026 तक रिकॉर्ड 93.70% पर पहुँच गया। इस दौरान मतदाताओं की संख्या भी 76.35 लाख से बढ़कर 6.40 करोड़ हो गई। इसी तरह के रुझान अन्य राज्यों में भी देखे गए हैं।

कई राज्यों में मतदान का बढ़ता ग्राफ़

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, अलग-अलग राज्यों में दशकों के दौरान मतदान प्रतिशत और कुल वोटों की संख्या में भारी उछाल आया है:

  • पुडुचेरी: 1964 में लगभग 65-70% मतदान हुआ था, जो 2026 में 91.19% तक पहुँच गया। कुल वोट 1.71 लाख से बढ़कर 8.66 लाख हो गए।
  • असम: 1951 में जहाँ मतदान 50% के करीब था, वहीं 2026 में यह 86.33% हो गया। वोटों की कुल संख्या 23.48 लाख से बढ़कर 2.16 करोड़ तक पहुँच गई।
  • तमिलनाडु: 1967 में लगभग 70% मतदान दर्ज किया गया था। कुछ उतार-चढ़ाव के बाद 2026 में यह 86.03% पर पहुँच गया और कुल मतदाताओं की संख्या 1.59 करोड़ से बढ़कर 4.93 करोड़ हो गई।
  • बिहार: यहाँ 1951 में मतदान लगभग 50% था, जो 2026 तक बढ़कर 67.25% हो गया। कुल मतदाता 1.02 करोड़ से बढ़कर 5.02 करोड़ हो गए।
  • केरल: राज्य में कुल वोटों की संख्या बढ़कर 2.16 करोड़ हो गई है।

क्यों ज़रूरी है मतदाता सूची का पुनरीक्षण?

चुनाव आयोग का कहना है कि ये आँकड़े जहाँ लोकतांत्रिक भागीदारी में वृद्धि को दर्शाते हैं, वहीं बढ़ती आबादी और पलायन जैसी चुनौतियों की ओर भी इशारा करते हैं। आयोग के अनुसार, कई बार मतदान प्रतिशत में गिरावट या ठहराव का एक बड़ा कारण मतदाता सूचियों में मौजूद त्रुटियाँ होती हैं। इनमें मृतकों, स्थानांतरित हो चुके लोगों या डुप्लीकेट नामों का शामिल रहना और नए पात्र नागरिकों का नाम न जुड़ पाना प्रमुख है।

इसी समस्या को हल करने के लिए 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) अभियान चलाया जाता है। इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं। इससे अपात्र नामों को सूची से हटाया जाता है और नए व योग्य मतदाताओं को शामिल किया जाता है। आयोग का मानना है कि अगर यह प्रक्रिया नियमित रूप से न हो, तो चुनावी सूचियों में गलतियाँ बढ़ सकती हैं, जिससे वास्तविक मतदाताओं की भागीदारी प्रभावित होती है और व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम हो सकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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