ईरान युद्ध पर अमेरिकी संसद में घमासान: ट्रंप की नीति पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन आमने-सामने
ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति पर संसद (सीनेट) में तीखी बहस छिड़ गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने इस युद्ध को…
ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीति पर संसद (सीनेट) में तीखी बहस छिड़ गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसदों ने इस युद्ध को गैरकानूनी बताते हुए इसमें अमेरिका की भागीदारी तुरंत खत्म करने की मांग की, जबकि रिपब्लिकन पार्टी ने राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों का पुरजोर बचाव किया है।
डेमोक्रेट्स ने ट्रंप प्रशासन पर अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की सही जानकारी छिपाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। सीनेट में डेमोक्रेट नेता चक शूमर ने कहा कि उनकी पार्टी इस सप्ताह युद्ध में अमेरिकी भागीदारी को समाप्त करने के लिए फिर से मतदान कराएगी। उन्होंने दावा किया, "पिछले कुछ हफ्तों में 500 से अधिक अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, लेकिन इनमें से करीब 100 सैनिकों की जानकारी पेंटागन ने सार्वजनिक नहीं की।"
सैनिकों की मौत और फंडिंग पर सवाल
डेमोक्रेटिक सीनेटर टिम केन ने इस संघर्ष को 'पसंद से शुरू किया गया युद्ध' करार दिया और कहा कि कांग्रेस इसे पहले ही गैरकानूनी घोषित कर चुकी है। उन्होंने बताया कि बुधवार को तीन और अमेरिकी सैनिकों के पार्थिव शरीर डोवर, डेलावेयर लाए जाएंगे, जिसके बाद इस संघर्ष में मारे गए अमेरिकी सैनिकों की कुल संख्या 18 हो जाएगी। अब तक लगभग 20 अमेरिकी सैनिक इस युद्ध में अपनी जान गंवा चुके हैं। केन ने साथी सीनेटरों से रक्षा बजट के जरिए इस युद्ध की फंडिंग रोकने की अपील करते हुए कहा, "हम पेंटागन को अरबों डॉलर नहीं दे सकते, जबकि वह एक ऐसे युद्ध में शामिल है जिसे गैरकानूनी माना गया है।"
ट्रंप के बचाव में रिपब्लिकन पार्टी
वहीं, रिपब्लिकन नेताओं ने राष्ट्रपति ट्रंप के कदमों को सही ठहराया है। रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम का उल्लंघन किया है और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही रोक रखी है। उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति के पास कानून के तहत कार्रवाई करने का अधिकार है। ईरान ने युद्धविराम का सम्मान नहीं किया और बातचीत के लिए भी तैयार नहीं हुआ।" थ्यून के मुताबिक, ट्रंप का मकसद ईरान पर दबाव बनाना है ताकि उसे दोबारा बातचीत की मेज पर लाया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन द्वारा मांगी गई अतिरिक्त फंडिंग सिर्फ ईरान युद्ध के लिए नहीं, बल्कि इस्तेमाल हो चुके हथियारों और गोला-बारूद की भरपाई के लिए भी है।
इनपुट: IANS



