केरल: CPI(M) की बैठक में चुनावी हार पर घमासान, विजयन और गोविंदन के नेतृत्व पर उठे सवाल
केरल में लगातार चुनावी हार के बाद, सत्तारूढ़ CPI(M) के भीतर गहरे मंथन का दौर जारी है। पार्टी की राज्य समिति की विस्तारित बैठक में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन के नेतृत्व पर…
केरल में लगातार चुनावी हार के बाद, सत्तारूढ़ CPI(M) के भीतर गहरे मंथन का दौर जारी है। पार्टी की राज्य समिति की विस्तारित बैठक में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन के नेतृत्व पर परोक्ष रूप से गंभीर सवाल उठाए गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोझिकोड में हो रही इस बैठक में प्रतिनिधियों ने हार का ठीकरा निचले स्तर के कार्यकर्ताओं पर फोड़ने की कोशिशों का कड़ा विरोध किया।
दिलचस्प बात यह है कि सबसे तीखी आलोचना पार्टी के सबसे मजबूत गढ़ माने जाने वाले कन्नूर के प्रतिनिधियों की ओर से आई। उन्होंने तर्क दिया कि जब सभी अहम फैसले राज्य का शीर्ष नेतृत्व लेता है, तो नाकामियों के लिए आम कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। बैठक में कोल्लम के प्रतिनिधियों ने भी इसी तरह की भावनाएं व्यक्त कीं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि असंतोष व्यापक है।
शीर्ष नेतृत्व की जवाबदेही पर जोर
बैठक में पार्टी सचिव एम.वी. गोविंदन द्वारा पेश की गई मसौदा सुधार रिपोर्ट चर्चा के केंद्र में रही। प्रतिनिधियों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि रिपोर्ट में हार की अधिकांश जिम्मेदारी संगठन के निचले ढाँचे पर डाल दी गई है। उनका मानना था कि शीर्ष नेतृत्व को अपनी जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। प्रतिनिधियों ने पार्टी के बड़े नेताओं की संसदीय महत्वाकांक्षाओं और व्यक्ति-केंद्रित राजनीति के पनपने की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि एक ऐसा सिस्टम बन गया है जहाँ नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए अलग-अलग नियम हैं, जिससे पार्टी की विश्वसनीयता को नुकसान पहुँचा है।
उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक संकट
चर्चा के दौरान उम्मीदवार चयन से जुड़े विवादों पर भी सवाल उठे। के.के. शैलजा को दूसरी सीट पर भेजने और ए.एन. शमसीर की उम्मीदवारी को संभालने के तरीके पर प्रश्न उठाए गए। तालिपारम्बा में उम्मीदवार चयन विवाद का रिपोर्ट में जिक्र न होने पर भी प्रतिनिधियों ने हैरानी जताई, जबकि पय्यानूर की हार का उल्लेख किया गया था।
बैठक में पार्टी के संगठनात्मक संकट पर भी चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में गिरावट, सक्रिय सदस्यों की संख्या में कमी और जन-संगठनों से मिलते समर्थन के कमजोर होने की ओर ध्यान दिलाया। यह भी कहा गया कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद से CPI(M) के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा कोई भी चुनाव नहीं जीत सका है और लगातार मिल रही हार की चेतावनियों को नजरअंदाज किया गया।
इनपुट: IANS



