भारत को रूस का सुखोई इंजन ऑफर: वायुसेना के लिए गेम-चेंजर, पर चीन पर भरोसे में जल्दबाज़ी नहीं - रक्षा विशेषज्ञ
रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) हेमंत महाजन ने रूस द्वारा भारत को सुखोई लड़ाकू विमानों के लिए दिए गए नए इंजन के प्रस्ताव को वायुसेना के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर बताया है। समाचार एजेंसी IANS की…
रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) हेमंत महाजन ने रूस द्वारा भारत को सुखोई लड़ाकू विमानों के लिए दिए गए नए इंजन के प्रस्ताव को वायुसेना के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर बताया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कहा कि यह पेशकश भारतीय वायुसेना की क्षमता में कई गुना वृद्धि कर सकती है। यह प्रस्ताव रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अपनी भारत यात्रा के दौरान दिया।
ब्रिगेडियर महाजन ने सुखोई विमानों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "भारतीय वायुसेना के बेड़े को देखें तो उसमें सुखोई, जगुआर, मिराज और राफेल जैसे लड़ाकू विमान शामिल हैं, लेकिन सुखोई सबसे आधुनिक विमानों में से एक है और वायुसेना के कुल बेड़े का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा है।"
सुखोई इंजन ऑफर के मायने
प्रस्तावित नए इंजन मौजूदा इंजनों से 7 प्रतिशत सस्ते और कहीं ज़्यादा शक्तिशाली हैं। ब्रिगेडियर महाजन के अनुसार, इससे सुखोई की मारक क्षमता काफी बढ़ जाएगी। उन्होंने कहा, "आज सुखोई विमान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात हैं। अधिक शक्तिशाली इंजन लगने से यह बड़े क्षेत्र को कवर करने में सक्षम होगा, यहां तक कि पूरे तिब्बत क्षेत्र तक इसकी पहुंच हो सकती है।" इस अपग्रेड से अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम जैसे पहाड़ी इलाकों के साथ-साथ समुद्री और रेगिस्तानी क्षेत्रों में भी विमान की प्रभावशीलता बढ़ेगी। उन्होंने इस सौदे को तकनीक हस्तांतरण और अमेरिकी विमानों की तुलना में कम कीमत जैसे पहलुओं के कारण भी फायदेमंद बताया।
चीन के साथ संबंधों पर सतर्कता
वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) हेमंत महाजन ने सतर्क रुख अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा, "मैं एक रणनीतिक विश्लेषक के तौर पर इस यात्रा को लेकर सतर्क रहूंगा और जमीनी स्तर पर ठोस कदम उठने के बाद ही इस पर भरोसा करूंगा।" उनके अनुसार, जब तक सीमा विवाद का समाधान नहीं होता, तब तक दोनों देशों के संबंध नहीं सुधर सकते, क्योंकि चीन सीमा पर 'स्लाइसिंग' यानी धीरे-धीरे जमीन हथियाने की नीति अपनाता है।
आर्थिक मोर्चे पर भी उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि भारत सरकार के प्रयासों के बावजूद चीन सिर्फ भारतीय बाजार का फायदा उठाना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन बहुत बड़ा है, जहाँ चीन से भारत का आयात 100 अरब डॉलर से अधिक है, वहीं भारत का निर्यात केवल 20 अरब डॉलर के करीब है। उन्होंने चीन द्वारा 'सप्लाई चेन वॉरफेयर' का इस्तेमाल करने, भारतीय कारोबारियों को वीजा देने में बाधा डालने और संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का विरोध करने जैसी समस्याओं का भी उल्लेख किया। ब्रिगेडियर महाजन ने स्पष्ट किया कि संबंधों में सुधार तभी संभव है जब चीन भारत को एक बराबर का साझेदार समझे।
इनपुट: IANS



