चेक बाउंस मामले में सज़ा के बाद विधायक मणि सी. कप्पन की अयोग्यता पर केरल हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
केरल के पाला से विधायक मणि सी. कप्पन की विधानसभा सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। केरल उच्च न्यायालय ने चार चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी अयोग्यता की मांग करने वाली एक याचिका…
केरल के पाला से विधायक मणि सी. कप्पन की विधानसभा सदस्यता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। केरल उच्च न्यायालय ने चार चेक बाउंस मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद उनकी अयोग्यता की मांग करने वाली एक याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अदालत ने इस महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर भी गौर किया कि क्या उनकी सज़ा के निलंबन का अयोग्यता पर कोई असर पड़ेगा।
न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने सुनवाई के दौरान मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा, "यदि सजा निलंबित कर दी जाती है तो इसका क्या प्रभाव होगा? क्या दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई जाएगी? यदि दोषसिद्धि निलंबित कर दी जाती है तो क्या अयोग्यता भी लागू नहीं होगी?" अदालत ने इस मामले पर आगे विचार के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है।
क्या है पूरा मामला?
यह याचिका कारोबारी दिनेश मेनन द्वारा दायर की गई है। मुंबई के बोरीवली स्थित अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने 1 सितंबर को मेनन की शिकायतों पर कप्पन को परक्राम्य लिखत अधिनियम के तहत चार मामलों में दोषी पाया था। इन सभी मामलों में कुल मिलाकर कप्पन को साढ़े तीन साल की सज़ा सुनाई गई है।
फैसले के मुताबिक, एक मामले में एक साल की सज़ा और 1.20 करोड़ रुपये का मुआवजा, दो अन्य मामलों में एक-एक साल की सज़ा और प्रत्येक में 1.70 करोड़ रुपये का मुआवजा तथा चौथे मामले में छह महीने की सज़ा और 70 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया है।
याचिकाकर्ता की मांग
दिनेश मेनन ने पहले विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क कर कप्पन को दोषसिद्धि की तारीख से अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। अपनी याचिका में उन्होंने तर्क दिया है कि जब वहां से कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्हें न्यायिक हस्तक्षेप के लिए उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। याचिका में मांग की गई है कि स्पीकर को पाला विधानसभा सीट को रिक्त घोषित करने और भारत निर्वाचन आयोग को उपचुनाव कराने का निर्देश दिया जाए।
पाला की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता
कोट्टायम जिले की पाला सीट दशकों से कप्पन और मणि परिवारों के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का केंद्र रही है। 2006 से कप्पन ने केएम मणि के खिलाफ लगातार तीन चुनाव लड़े और हारे। 2019 में केएम मणि के निधन के बाद हुए उपचुनाव में उन्होंने पहली बार जीत हासिल की। 2021 के चुनाव में समीकरण बदले और कप्पन कांग्रेस के नेतृत्व वाले UDF में शामिल हो गए, जबकि केएम मणि के बेटे जोस मणि की पार्टी वाम मोर्चे में चली गई। कप्पन ने 2021 में जोस मणि को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी। कप्पन का कहना है कि वह दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करेंगे।
इनपुट: IANS



