सोमवार, 31 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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निवेश के लिए भारतीय कंपनियों की मदद को तैयार अमेरिका, राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया समझाएगा

अमेरिका भारत के साथ अपने निवेश संबंधों को और गहरा करने का इच्छुक है। इतना ही नहीं, वह भारतीय कंपनियों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया को समझने और उसमें आगे बढ़ने में भी मदद करने के लिए…

निवेश के लिए भारतीय कंपनियों की मदद को तैयार अमेरिका, राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया समझाएगा
(फोटो: IANS)

अमेरिका भारत के साथ अपने निवेश संबंधों को और गहरा करने का इच्छुक है। इतना ही नहीं, वह भारतीय कंपनियों को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा प्रक्रिया को समझने और उसमें आगे बढ़ने में भी मदद करने के लिए तैयार है। समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में अमेरिकी वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक से पहले यह बात कही।

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अमेरिकी असिस्टेंट सेक्रेटरी क्रिस पिलकर्टन ने कहा, "मैं भारतीय अधिकारियों और भारतीय कंपनियों से मिलने का अवसर चाहता हूं, ताकि हम देख सकें कि कमेटी ऑन फॉरेन इन्वेस्टमेंट इन द यूनाइटेड स्टेट्स (सीएफआईयूएस) प्रक्रिया के जरिए साथ मिलकर काम करने के कौन-कौन से रास्ते हो सकते हैं।" यह समिति अमेरिका में होने वाले कुछ विदेशी निवेशों की राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से समीक्षा करती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा की प्रक्रिया क्या है?

पिलकर्टन ने स्पष्ट किया कि निवेश की समीक्षा करते समय समिति यह नहीं देखती कि पैसा किस देश से आ रहा है, बल्कि हर मामले का मूल्यांकन उसके अपने तथ्यों के आधार पर किया जाता है। उन्होंने बताया, "अमेरिका में विदेशी निवेश की समीक्षा करने वाली समिति इस बात से प्रभावित नहीं होती कि पूंजी किस देश से आ रही है। हम हर मामले का राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से अलग-अलग मूल्यांकन करते हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि समिति द्वारा समीक्षा किए गए लगभग 90 प्रतिशत लेन-देन को मंजूरी मिल जाती है, हालांकि कुछ मामलों में सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने पड़ते हैं।

'अमेरिका फर्स्ट' का मतलब 'अमेरिका अकेला' नहीं

भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका पर पिलकर्टन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का ध्यान 'अमेरिका फर्स्ट' पर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका अकेले आगे बढ़ना चाहता है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का हवाला देते हुए कहा, "यह अमेरिका 'फर्स्ट प्रशासन' है और हमारा फोकस 'अमेरिका फर्स्ट' पर है, लेकिन जैसा राष्ट्रपति ट्रंप कह चुके हैं, इसका मतलब अमेरिका अकेले नहीं है।" उन्होंने कहा कि अमेरिका साझा लक्ष्यों के लिए कई देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है और भारत को 'एक महत्वपूर्ण साझेदार' बताया, जिसके साथ 'बेहतरीन संबंध' विकसित हुए हैं।

G20 बैठक के एजेंडे में क्या?

ऐशविले में होने वाली G20 बैठक के एजेंडे में वैश्विक आर्थिक विकास, व्यापार असंतुलन, मजबूत सप्लाई चेन और निवेश जैसे मुद्दे शामिल रहेंगे। पिलकर्टन के अनुसार, इस बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, हाइपरसोनिक तकनीक और जैव प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर भी चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका इन क्षेत्रों में अपने साझेदार देशों के साथ सुरक्षित सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।

इनपुट: IANS

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