ओवैसी ने उठाए सवाल: BJP-RSS के भाईचारे के दावों और मुसलमानों को टिकट न देने में विरोधाभास
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की नीतियों पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने भाईचारे की बातों और…
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की नीतियों पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने भाईचारे की बातों और ज़मीनी हकीकत में अंतर होने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक तरफ भाईचारे की बात होती है, तो दूसरी तरफ मुसलमानों को चुनावी टिकट नहीं दिए जाते। समाचार एजेंसी IANS से एक विशेष बातचीत में उन्होंने उत्तर प्रदेश चुनाव, सिंधु जल संधि और देश में धार्मिक स्वतंत्रता जैसे कई मुद्दों पर अपनी राय रखी।
ओवैसी ने मॉब लिंचिंग, समान नागरिक संहिता (UCC) और बुलडोजर कार्रवाई जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि ऐसे माहौल में भाईचारा कहाँ है। उन्होंने कहा, "लोगों के घर गिराने जैसी कार्रवाइयां गलत और जनता को भ्रमित करने वाली हैं।"
उत्तर प्रदेश चुनाव और सिंधु जल संधि
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर ओवैसी ने कहा कि पार्टी पूरी ताकत से मैदान में उतर रही है, लेकिन अभी किसी भी तरह का आंकड़ा या आकलन देना जल्दबाजी होगी। उन्होंने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी और वह 20 सितंबर के बाद फिर से राज्य का दौरा करेंगे।
सिंधु जल संधि को निलंबित करने की चर्चा पर उन्होंने एक व्यावहारिक सवाल उठाया। ओवैसी ने कहा, "यदि भारत पानी को रोकता है तो उसे कहां जमा किया जाएगा और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा?" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते" लेकिन इसके साथ ही पानी के भंडारण और उपयोग की एक ठोस योजना भी सामने रखनी होगी।
RSS की विचारधारा पर निशाना
ओवैसी ने RSS पर लोकतंत्र में विश्वास न करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि संगठन की विचारधारा में "एक झंडे, एक नेता और एक विचारधारा" की अवधारणा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग भारत में मुसलमानों के रहने पर सवाल उठाते हैं, उनकी पहचान होनी चाहिए, और दावा किया कि ऐसी मानसिकता के पीछे RSS से जुड़ी विचारधारा है। ओवैसी ने यह भी कहा कि RSS के कुछ हालिया बयान अमेरिकी विदेश विभाग के धार्मिक स्वतंत्रता कार्यालय के दबाव का नतीजा हो सकते हैं।
इनपुट: IANS



