शनिवार, 25 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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पाकिस्तान में 'हाइब्रिड सत्ता': रिपोर्ट में सेना के दबदबे और देश के सामने खड़ी चुनौतियों का विश्लेषण

पाकिस्तान में सत्ता का केंद्र केवल चुनी हुई सरकार नहीं, बल्कि सेना है जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर नागरिक राजनीति तक में निर्णायक भूमिका निभाती है। 'द टाइम्स ऑफ इज़रायल' में प्रकाशित एक…

पाकिस्तान में 'हाइब्रिड सत्ता': रिपोर्ट में सेना के दबदबे और देश के सामने खड़ी चुनौतियों का विश्लेषण
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान में सत्ता का केंद्र केवल चुनी हुई सरकार नहीं, बल्कि सेना है जो देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से लेकर नागरिक राजनीति तक में निर्णायक भूमिका निभाती है। 'द टाइम्स ऑफ इज़रायल' में प्रकाशित एक रिपोर्ट में राजनीतिक शोधकर्ता वास शेनॉय ने देश की व्यवस्था को एक "हाइब्रिड सिस्टम" बताया है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से मिली इस रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान इस समय वैधता के संकट, बिगड़ती सुरक्षा और गंभीर आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार कई मोर्चों पर घिरी हुई है। इनमें 2024 के आम चुनावों की निष्पक्षता पर उठ रहे सवाल, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनके समर्थकों की गिरफ्तारी, मीडिया पर कथित प्रतिबंध, न्यायपालिका की स्वतंत्रता में कमी और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा जैसे मुद्दे शामिल हैं। इन वजहों से पाकिस्तान के लाखों नागरिकों में यह धारणा बन गई है कि अब चुनावों के जरिए शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है, जिससे संवैधानिक राजनीति पर उनका भरोसा कम हो रहा है।

बिगड़ते सुरक्षा हालात और आतंकवाद

वास शेनॉय के अनुसार, पाकिस्तान का सुरक्षा माहौल लगातार खराब हो रहा है। एक तरफ तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने खैबर पख्तूनख्वा में अपने हमले बढ़ा दिए हैं, तो दूसरी तरफ बलूच अलगाववादी दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में सरकार को चुनौती दे रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामिक स्टेट-खुरासान (IS-K) और अन्य सांप्रदायिक संगठन भी सक्रिय हैं। अफगानिस्तान इनमें से कुछ समूहों के लिए सुरक्षित पनाहगाह का काम कर रहा है, जबकि आतंकवादी संगठनों के प्रति पाकिस्तान की अतीत की चयनात्मक नीति ने 'उपयोगी' और 'शत्रु' समूहों के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया है।

आर्थिक चुनौतियां और परमाणु सुरक्षा

आर्थिक मोर्चे पर, अंतरराष्ट्रीय मदद से भुगतान संतुलन का तात्कालिक संकट भले ही टल गया हो, लेकिन पाकिस्तान अब भी भारी कर्ज, कमजोर कर-ढांचा और ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय समस्याओं जैसी संरचनात्मक चुनौतियों से घिरा है। शेनॉय ने बताया कि गरीबी, तेजी से बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदाएं देश की क्षमता को और कमजोर कर रही हैं। रिपोर्ट में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों को लेकर भी आगाह किया गया है। हालांकि ये हथियार फिलहाल कड़ी सुरक्षा में हैं, लेकिन भविष्य में अंदरूनी मिलीभगत से चोरी, तोड़फोड़ या सैन्य तंत्र में विभाजन जैसे जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अमेरिका के लिए सुझाव

रिपोर्ट में अमेरिका को सुझाव दिया गया है कि वह पाकिस्तान के साथ आर्थिक सहयोग जारी रखे, लेकिन साथ ही विश्वसनीय चुनाव और मजबूत नागरिक शासन के लिए स्पष्ट शर्तें भी रखे। शेनॉय ने वॉशिंगटन को आगाह किया कि वह सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर को वैसा समर्थन देने से बचे, जैसा अतीत में जनरल जिया-उल-हक को दिया गया था।

इनपुट: IANS

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