चीन के AI रोबोट से जासूसी का खतरा? अमेरिका में बैन लगाने के लिए विधेयक पेश
अमेरिकी संसद में चीन में बने ह्यूमनॉइड और चार पैरों वाले रोबोट पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक विधेयक पेश किया गया है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों ने चिंता जताई है कि इंटरनेट से जुड़े ये रोबोट…
अमेरिकी संसद में चीन में बने ह्यूमनॉइड और चार पैरों वाले रोबोट पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक विधेयक पेश किया गया है। दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों ने चिंता जताई है कि इंटरनेट से जुड़े ये रोबोट भविष्य में अमेरिका के लिए जासूसी का हथियार बन सकते हैं और देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को नुकसान पहुँचा सकते हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, 'गार्ड एक्ट' नामक इस विधेयक का उद्देश्य चीन की रोबोटिक्स तकनीक को अमेरिकी उद्योगों में जड़ें जमाने से पहले ही रोकना है।
यह कदम चीन की उन कंपनियों पर पहले से लगे प्रतिबंधों की अगली कड़ी है जो दूरसंचार उपकरण और ड्रोन बनाती हैं। सांसदों का तर्क है कि चीन रोबोटिक्स बाजार में भी वही रणनीति अपना रहा है जिसका इस्तेमाल उसने वैश्विक ड्रोन बाजार पर कब्जा करने के लिए किया था।
क्यों है यह चिंता का विषय?
संसदीय समिति के सामने पेश हुए विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि चीनी रोबोट सिर्फ़ एक आर्थिक खतरा नहीं हैं, बल्कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक 'ट्रोजन हॉर्स' साबित हो सकते हैं। एसोसिएशन फॉर अनक्रूड व्हीकल सिस्टम्स इंटरनेशनल के सीईओ माइकल रॉबिन्स ने कहा, "एक हैक किया गया लैपटॉप डेटा लीक कर सकता है, लेकिन एक कॉम्प्रोमाइज्ड रोबोट डेटा लीक करने के साथ-साथ किसी फैक्ट्री, अस्पताल, पावर प्लांट या सैन्य ठिकाने के अंदर घूमकर निगरानी और तोड़-फोड़ भी कर सकता है।"
रॉबिन्स ने बताया कि ह्यूमनॉइड रोबोट की वैश्विक आपूर्ति का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही चीनी कंपनियों के नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी सब्सिडी के कारण ये रोबोट बेहद सस्ते हैं, जिससे अमेरिकी शोध संस्थान भी इन्हें खरीदने लगे हैं। उन्होंने गवाही में कहा, "ये कनेक्टेड सिस्टम सीधे चीन को डेटा भेजते हैं। ये रोबोट सेंसर के जरिए मैपिंग, निगरानी और ऑडियो इकट्ठा कर रहे हैं।"
चीन की रणनीति और अमेरिका की तैयारी
समिति के अध्यक्ष ब्रेट गुथरी ने कहा, "हम चीन जैसे प्रतिद्वंद्वी देशों से पैदा होने वाले खतरों के प्रति लगातार सतर्क हैं और अमेरिका के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा तथा नागरिकों के डेटा की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।" सांसदों का मानना है कि जितनी देर की जाएगी, अमेरिकी उद्योगों की चीनी तकनीक पर निर्भरता उतनी ही बढ़ेगी और बाद में इसे बदलना और भी मुश्किल और महंगा हो जाएगा।
व्हाइट हाउस की पूर्व टेक्नोलॉजी सलाहकार लिंडसे गोरमन ने भी आगाह किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने साइबर सुरक्षा के परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिका को चीन के सस्ते एआई मॉडल का मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भरोसेमंद सप्लाई चेन बनानी चाहिए और कम लागत वाले विकल्प तैयार करने चाहिए।
इनपुट: IANS



