यमन: मोचा पर हूती हमलों के बाद बढ़ा तनाव, संयुक्त राष्ट्र ने बड़े संघर्ष की चेतावनी दी
यमन में लाल सागर के बंदरगाह शहर मोचा पर हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर संघर्ष छिड़ने की आशंका बढ़ा दी है। यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने इन…
यमन में लाल सागर के बंदरगाह शहर मोचा पर हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर संघर्ष छिड़ने की आशंका बढ़ा दी है। यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने इन हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है कि सैन्य तनाव में यह बढ़ोतरी देश को फिर से भीषण लड़ाई की ओर धकेल सकती है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, रविवार को हूती समूह ने मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल कर मोचा और पश्चिमी तट पर सरकार-नियंत्रित अन्य क्षेत्रों को निशाना बनाया था। स्थानीय चिकित्सा सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इन हमलों में कम से कम आठ लोगों की जान चली गई, जिनमें चार आम नागरिक और चार सरकारी सैनिक शामिल थे। इसके अलावा लगभग 32 अन्य लोग घायल हुए हैं।
मोचा बंदरगाह पर भारी नुकसान
इन हमलों का केंद्र मोचा बंदरगाह रहा, जहाँ बुनियादी ढाँचे को गंभीर क्षति पहुँची है। बंदरगाह के निदेशक अब्दुल मलिक अल-शराबी ने एक प्रेस बयान में कहा कि हूती विद्रोहियों ने दर्जनों ड्रोन दागे, जिनमें से लगभग 25 ड्रोनों ने आर्थिक प्रतिष्ठानों, कर्मचारी आवास और एक कस्टम हैंगर को निशाना बनाया। यमन के परिवहन मंत्रालय ने भी पुष्टि की है कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों से बंदरगाह को भारी नुकसान हुआ है, जिसके बाद सरकार के नियंत्रण वाले सभी बंदरगाहों, हवाई अड्डों और सीमा चौकियों पर सुरक्षा और आपातकालीन उपाय कड़े कर दिए गए हैं।
अप्रैल 2022 के बाद सबसे बड़ी सैन्य गतिविधि
विशेष दूत हैंस ग्रंडबर्ग ने एक बयान में कहा कि अप्रैल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद से यह सैन्य गतिविधि में सबसे तेज वृद्धि है। उन्होंने कहा, "इन हमलों से यमन में बड़े पैमाने पर फिर से लड़ाई का खतरा तेजी से बढ़ गया है।" ग्रंडबर्ग ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और तनाव कम करने के लिए उनके कार्यालय के साथ मिलकर काम करने का आग्रह किया है।
यमन 2014 के अंत से ही गृह युद्ध की चपेट में है, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना सहित उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया था। 2015 में, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में हस्तक्षेप किया। हालांकि, अप्रैल 2022 में एक युद्धविराम लागू हुआ था, जो अक्टूबर में समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद भी काफी हद तक शांति बनी हुई थी, जो इन ताजा हमलों से भंग हो गई है।
इनपुट: IANS



