सरकारी कर्ज और बॉन्ड यील्ड का बढ़ता दायरा: उदय कोटक ने महंगाई और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की चेतावनी दी
दुनियाभर के बॉन्ड बाज़ारों में बढ़ती यील्ड (Bond Yield) को लेकर दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने एक अहम चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि सरकारों पर बढ़ते कर्ज और राजकोषीय घाटे के कारण केंद्रीय बैंकों…
दुनियाभर के बॉन्ड बाज़ारों में बढ़ती यील्ड (Bond Yield) को लेकर दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने एक अहम चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा है कि सरकारों पर बढ़ते कर्ज और राजकोषीय घाटे के कारण केंद्रीय बैंकों को ज़्यादा पैसा छापने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है, जिससे निकट भविष्य में महंगाई और ब्याज दरें दोनों बढ़ सकती हैं।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोटक ने यह विश्लेषण ऐसे समय में पेश किया है जब वैश्विक स्तर पर बॉन्ड यील्ड में तेज़ उछाल देखा जा रहा है। विशेष रूप से, जापान में 10-साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड 3% का स्तर पार कर गई है, जो 1996 के बाद से अब तक का सबसे ऊँचा आँकड़ा है। वहीं, अमेरिका में भी 10-साल की बॉन्ड यील्ड 4.8% के आसपास बनी हुई है।
कर्ज, नोटों की छपाई और महंगाई का चक्र
उदय कोटक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी चिंता ज़ाहिर करते हुए लिखा, "जापान के 10 साल की बॉन्ड यील्ड 3 प्रतिशत और अमेरिका की 4.8 प्रतिशत के पार पहुंच गया है। जैसे-जैसे सरकारों पर कर्ज और घाटा बढ़ रहा है, केंद्रीय बैंकों के पास बैलेंस शीट बढ़ाने (यानी और पैसे छापने) के अलावा कोई चारा नहीं बचेगा।"
उन्होंने इसके सीधे असर की ओर इशारा करते हुए आगे कहा, "ऐसा होने पर महंगाई बढ़ेगी और छोटी अवधि में ब्याज दरें भी ऊपर जाएंगी। ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के लिए तैयार रहें!" आसान शब्दों में, जब सरकारें ज़्यादा खर्च करती हैं और उनका घाटा बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक को अर्थव्यवस्था में ज़्यादा पैसा डालना पड़ता है। इससे मुद्रा का मूल्य घटता है और महंगाई बढ़ती है, जिसे काबू में करने के लिए ब्याज दरें बढ़ानी पड़ती हैं।
जापान के बॉन्ड बाज़ार का वैश्विक असर
जापान की बॉन्ड यील्ड में हो रही यह हलचल वैश्विक वित्तीय बाज़ारों के लिए काफी मायने रखती है। परंपरागत रूप से, जापान में ब्याज दरें बहुत कम रही हैं, जिस वजह से जापानी निवेशक बेहतर रिटर्न के लिए अपना पैसा विदेशों के बॉन्ड और अन्य संपत्तियों में लगाते रहे हैं।
लेकिन अब स्थिति बदल रही है। पिछले दो सालों में ही जापान के 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड तीन गुने से ज़्यादा बढ़ चुकी है। इसकी वजह बढ़ती महंगाई और यह उम्मीद है कि बैंक ऑफ जापान भी ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अगर जापानी निवेशकों को अपने ही देश में बेहतर रिटर्न मिलने लगे, तो वे विदेशी बाज़ारों में अपना निवेश कम कर सकते हैं। इस कदम से दुनियाभर में बॉन्ड यील्ड पर और दबाव पड़ सकता है।
इनपुट: IANS



