ट्विशा शर्मा सुसाइड केस: बहू को 'कातिल' कहने पर पूर्व जज की दलील- 'गुस्से में कहा था', HC में जमानत पर फैसला सुरक्षित
भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में आरोपी पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह ने अपनी बहू को आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता के आरोपों को खारिज कर दिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में…
भोपाल के चर्चित ट्विशा शर्मा आत्महत्या मामले में आरोपी पूर्व न्यायिक अधिकारी गिरिबाला सिंह ने अपनी बहू को आत्महत्या के लिए उकसाने और क्रूरता के आरोपों को खारिज कर दिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अपनी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्होंने दलील दी कि गर्भपात को लेकर बहू से नाराजगी को उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की बेंच ने जमानत पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
नोएडा की रहने वाली ट्विशा शर्मा की शादी के महज पांच महीने बाद 12 मई को भोपाल स्थित उनके ससुराल में मौत हो गई थी। उनका शव फंदे से लटका मिला था। ट्विशा के परिवार ने उनके पति समर्थ सिंह और ससुराल वालों पर घरेलू हिंसा और दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। समर्थ सिंह, जो कि एक वकील हैं, आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह के बेटे हैं। ट्विशा और समर्थ की मुलाकात एक डेटिंग ऐप के जरिए हुई थी।
बचाव पक्ष की दलीलें
सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह के वरिष्ठ वकील ने कोर्ट में कहा कि वह अपनी बहू ट्विशा के गर्भपात कराने के फैसले से खुश नहीं थीं, क्योंकि वह और उनका बेटा समर्थ उस बच्चे को चाहते थे। वकील ने यह भी तर्क दिया कि गिरिबाला ने न तो ट्विशा को गर्भपात के लिए मजबूर किया और न ही कोई क्रूरता की।
व्हाट्सएप चैट में ट्विशा को 'कातिल' कहने के आरोप पर बचाव पक्ष ने कहा कि ये शब्द सिर्फ गुस्से और आवेश में कहे गए थे। वकील ने दलील दी, "सास इसलिए बहुत परेशान थीं, क्योंकि बहू उनकी बात नहीं सुन रही थी और उसने गर्भपात करवा लिया। सास की प्रतिक्रिया केवल गुस्से में थी और बाद में उन्होंने अपनी बातों के लिए माफी भी मांग ली थी।" बचाव पक्ष के अनुसार, इन शब्दों का यह मतलब नहीं है कि उन्होंने ट्विशा को आत्महत्या के लिए उकसाया।
अभियोजन पक्ष का विरोध
वहीं, अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने जमानत याचिका का जोरदार विरोध किया। उन्होंने आशंका जताई कि अगर गिरिबाला सिंह को जमानत दी जाती है, तो वह जांच लंबित रहने के दौरान गवाहों और सबूतों को प्रभावित कर सकती हैं।
मामले में कटारा हिल्स पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता और दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज है। गिरिबाला सिंह को पहले एक सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई थी, लेकिन बाद में राज्य सरकार और ट्विशा के परिवार की चुनौती पर हाईकोर्ट ने इसे रद्द कर दिया था। अब सभी की निगाहें हाईकोर्ट के ताजा फैसले पर टिकी हैं।
इनपुट: IANS



