रविवार, 2 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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अमेरिका-सऊदी अरब परमाणु समझौता: ट्रंप ने दी मंज़ूरी, अमेरिकी कंपनियों को हो सकता है बड़ा फ़ायदा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक महत्वपूर्ण परमाणु सहयोग समझौते को औपचारिक रूप से अपनी सहमति दे दी है। समाचार एजेंसी IANS ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस…

अमेरिका-सऊदी अरब परमाणु समझौता: ट्रंप ने दी मंज़ूरी, अमेरिकी कंपनियों को हो सकता है बड़ा फ़ायदा
(फोटो: IANS)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक महत्वपूर्ण परमाणु सहयोग समझौते को औपचारिक रूप से अपनी सहमति दे दी है। समाचार एजेंसी IANS ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि इस 30-वर्षीय समझौते से सऊदी अरब को अपने नागरिक परमाणु कार्यक्रम (civilian nuclear program) को विकसित करने में मदद मिलेगी और अमेरिकी कंपनियों के लिए अरबों डॉलर के व्यापार का रास्ता खुल सकता है। उम्मीद है कि बुधवार को अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान इस पर हस्ताक्षर करेंगे।

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सऊदी अरब लंबे समय से अपनी अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और तेल पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। इसी योजना के तहत वह नागरिक परमाणु ऊर्जा विकसित करना चाहता है ताकि देश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके और निर्यात के लिए अधिक तेल बचाया जा सके। यह समझौता इसी लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

समझौते के प्रमुख प्रावधान और चिंताएँ

इस सौदे को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि सऊदी अरब के उभरते परमाणु बुनियादी ढाँचे के केंद्र में अमेरिकी कंपनियाँ रहें, जिससे विदेशी प्रतिस्पर्धियों को बाहर रखा जा सके। इसके तहत अमेरिकी कंपनियों को रिएक्टर बनाने, परमाणु ईंधन सेवाएँ देने और अन्य संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए बड़े ठेके मिल सकते हैं।

'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते का एक सबसे अहम और संवेदनशील प्रावधान सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन (enrichment) प्लांट बनाने की अनुमति से जुड़ा है। हालाँकि, यह प्रोजेक्ट तभी आगे बढ़ेगा जब अमेरिका और सऊदी अरब का एक संयुक्त अध्ययन यह निष्कर्ष निकालेगा कि ऐसे प्लांट की वास्तव में ज़रूरत है।

दोहरी उपयोग की तकनीक पर बहस

यूरेनियम संवर्धन एक ऐसी तकनीक है जिसका इस्तेमाल नागरिक परमाणु रिएक्टरों के लिए ईंधन बनाने में होता है। लेकिन इसी तकनीक का उच्च स्तर पर इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने के लिए भी किया जा सकता है। इसी दोहरे उपयोग की क्षमता के कारण, मध्य-पूर्व में इस संवेदनशील तकनीक के प्रसार को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में चिंताएँ फिर से बढ़ सकती हैं।

हालाँकि, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का तर्क है कि इस प्रक्रिया में सीधी अमेरिकी भागीदारी से सऊदी परमाणु कार्यक्रम पर वॉशिंगटन का प्रभाव बढ़ेगा। उनका मानना है कि इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि परमाणु तकनीक का इस्तेमाल सैन्य उद्देश्यों के लिए न हो। राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले हफ़्ते के अंत में इस समझौते को मंजूरी दी थी।

इनपुट: IANS

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