मानसून की बेरुखी और अल नीनो का असर: धान की बुआई में 14% से ज्यादा की गिरावट, खरीफ का कुल रकबा भी घटा
इस साल देश में मानसून की कमी और अल नीनो के मौसम पर पड़ रहे प्रभाव का असर खरीफ फसलों की बुआई पर साफ दिखने लगा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में धान की खेती का…
इस साल देश में मानसून की कमी और अल नीनो के मौसम पर पड़ रहे प्रभाव का असर खरीफ फसलों की बुआई पर साफ दिखने लगा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में धान की खेती का रकबा 14.37 प्रतिशत तक घट गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 14 अगस्त तक देशभर में खरीफ फसलों की कुल बुआई 1016.57 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले साल इसी समय के 1037.52 लाख हेक्टेयर के आंकड़े से कम है।
धान पर सबसे ज़्यादा असर, दालें स्थिर
सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करें तो धान यानी चावल की फसल पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। इस साल अब तक धान की खेती 379.07 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि बीते साल यह आंकड़ा 393.44 लाख हेक्टेयर था। हालांकि, कम पानी की जरूरत वाली फसलों पर इसका ज्यादा असर नहीं हुआ है। उड़द और मूंग जैसी दालों की खेती का रकबा 108.14 लाख हेक्टेयर पर लगभग स्थिर बना हुआ है, जो पिछले साल 108.49 लाख हेक्टेयर था।
अन्य प्रमुख फसलों की स्थिति
अन्य फसलों की बात करें तो ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाजों (मिलेट्स) का रकबा भी थोड़ा घटा है। यह पिछले साल के 177.13 लाख हेक्टेयर के मुकाबले इस सीजन में 172.96 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। इसी तरह, कपास की बुआई 107.30 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल के 108.26 लाख हेक्टेयर के करीब ही है। गन्ने की खेती का रकबा भी 58.62 लाख हेक्टेयर से मामूली घटकर 58.31 लाख हेक्टेयर पर आ गया है।
किसानों को राहत देने के लिए सरकार का कदम
किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने पहले ही कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (सीसीईए) ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी थी। यह फैसला केंद्रीय बजट 2018-19 की उस घोषणा के अनुरूप है, जिसमें उत्पादन लागत का कम से कम डेढ़ गुना MSP तय करने का वादा किया गया था। सरकार के अनुसार, मूंग पर 61%, बाजरा और मक्का पर 56%, और तुअर (अरहर) पर 54% का मार्जिन मिलने का अनुमान है।
इनपुट: IANS



