मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

अहमदाबाद रियल एस्टेट धोखाधड़ी: निवेशकों को धोखा देकर खरीदी 130 करोड़ की संपत्तियां ईडी ने कीं कुर्क

अहमदाबाद में घर खरीदारों और निवेशकों से कथित धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निर्णायक कार्रवाई की है। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत लगभग 129.80 करोड़ रुपये…

अहमदाबाद रियल एस्टेट धोखाधड़ी: निवेशकों को धोखा देकर खरीदी 130 करोड़ की संपत्तियां ईडी ने कीं कुर्क
(फोटो: IANS)

अहमदाबाद में घर खरीदारों और निवेशकों से कथित धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने निर्णायक कार्रवाई की है। एजेंसी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत लगभग 129.80 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई रोनक रवजीभाई सोनानी, विपुलभाई गोरधनभाई गंगानी, केशव नारायण ग्रुप और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ की गई है।

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ईडी ने सोमवार को एक बयान जारी कर बताया कि यह कुर्की आदेश 14 अगस्त को पारित किया गया था। इस मामले की जड़ अहमदाबाद के कई पुलिस स्टेशनों में दर्ज पांच अलग-अलग एफआईआर से जुड़ी है। इन एफआईआर के आधार पर ही ईडी ने अपनी जांच शुरू की थी।

कैसे दिया गया धोखाधड़ी को अंजाम?

जांच में यह बात सामने आई कि आरोपियों ने घर खरीदारों, छोटे निवेशकों और मध्यम वर्गीय परिवारों को निशाना बनाया। उन्होंने अपनी रियल एस्टेट योजनाओं को पूरी तरह वैध बताकर आकर्षक प्री-लॉन्च कीमतों पर फ्लैट और दुकानें बेचने का झांसा दिया। निवेशकों को 54% से लेकर 100% तक के सुनिश्चित रिटर्न का वादा भी किया गया था। हालांकि, इन परियोजनाओं का प्रचार बिना किसी आवश्यक मंजूरी, जैसे कि नॉन-एग्रीकल्चर (NA) अनुमति और RERA पंजीकरण के ही किया जा रहा था।

परियोजनाओं के नाम पर उगाही

आरोपियों ने 'छारोड़ी' परियोजना के लिए करीब 250 खरीदारों से पैसे जुटाए, जबकि 'अक्षर अनंत' नामक एक अन्य परियोजना में 44 से अधिक लोगों से निवेश हासिल किया। लेकिन अंत में निवेशकों को न तो वादे के मुताबिक फ्लैट या दुकानें मिलीं और न ही उनकी जमा राशि वापस की गई। ईडी के अनुसार, छारोड़ी परियोजना के निवेशकों को यह कहकर गुमराह किया गया कि RERA पंजीकरण और NA अनुमति की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन बाद में परियोजना की जमीन महेंद्रभाई पटेल और आशीष विष्णुभाई पटेल समेत अन्य लोगों को बेच दी गई। इसी तरह, शेला स्थित अक्षर अनंत परियोजना को भी बाद में बंद कर दिया गया और उसकी जमीन दूसरे लोगों को ट्रांसफर कर दी गई।

धन का हेरफेर और फर्जी दस्तावेज

ईडी की जांच से पता चला कि आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीके से पहले निवेशकों से पैसा इकट्ठा किया, फिर उस धन को दूसरी जगहों पर स्थानांतरित किया। बाद में, इस पैसे से खरीदी गई संपत्तियों को छिपाने के लिए फर्जी बिक्री दस्तावेजों का सहारा लिया गया। लेनदेन को वैध दिखाने के लिए इन दस्तावेजों में काल्पनिक भुगतान का विवरण भी दर्ज किया गया था। मामले में रोनक सोनानी और विपुल गंगानी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोपपत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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