तमिलनाडु में निजी कॉलेजों के डीम्ड यूनिवर्सिटी बनने से सरकारी कोटे की 700 MBBS सीटें खतरे में: PMK
तमिलनाडु में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए मेडिकल की पढ़ाई महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) ने आरोप लगाया है कि राज्य के छह निजी मेडिकल कॉलेजों के डीम्
तमिलनाडु में गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए मेडिकल की पढ़ाई महंगी होने की आशंका जताई जा रही है। पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) ने आरोप लगाया है कि राज्य के छह निजी मेडिकल कॉलेजों के डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी में बदलने की प्रक्रिया से सरकारी कोटे की लगभग 700 एमबीबीएस सीटें खत्म हो जाएंगी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीएमके अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने बुधवार को एक बयान जारी कर इस पर चिंता व्यक्त की।
डॉ. रामदास ने बताया कि तीन निजी संस्थान — सेंट पीटर्स मेडिकल कॉलेज, धनलक्ष्मी श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज और चेन्नई स्थित श्रीनिवासन मेडिकल कॉलेज — को पहले ही डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल चुका है। इस बदलाव के कारण राज्य को सरकारी कोटे की करीब 350 एमबीबीएस सीटों का नुकसान हुआ है। उन्होंने दावा किया कि तीन और निजी कॉलेजों को जल्द ही यह दर्जा मिलने की संभावना है, जिनमें मदुरंथकम स्थित करपगा विनायगा मेडिकल कॉलेज भी शामिल है। इससे सरकारी कोटे की 350 और सीटें कम हो जाएंगी।
फीस में भारी वृद्धि की आशंका
पीएमके नेता के अनुसार, इस बदलाव का सीधा असर छात्रों की जेब पर पड़ेगा। फिलहाल, निजी कॉलेजों में सरकारी कोटे के तहत दाखिला लेने वाले छात्र सालाना 4.35 लाख रुपये से 5.40 लाख रुपये तक की ट्यूशन फीस देते हैं। लेकिन, इन संस्थानों के डीम्ड यूनिवर्सिटी बन जाने के बाद यही फीस बढ़कर 23 लाख से 30 लाख रुपये सालाना तक हो सकती है। डॉ. रामदास ने कहा कि इससे चिकित्सा शिक्षा गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की पहुंच से लगभग बाहर हो जाएगी।
राज्य में सीटों का गणित और सरकार से मांग
वर्तमान में, तमिलनाडु में एमबीबीएस की कुल लगभग 13,000 सीटें हैं। इनमें 36 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 5,050, 22 निजी कॉलेजों में 3,900, पांच निजी विश्वविद्यालयों में 850, डीम्ड यूनिवर्सिटियों में 3,050 और एक केंद्रीय संस्थान में 150 सीटें शामिल हैं। डॉ. रामदास ने यह भी सवाल उठाया कि तमिलनाडु डॉ. एमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी से संबद्ध इन कॉलेजों को बिना एनओसी के डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा कैसे दिया जा रहा है।
इस स्थिति से निपटने के लिए, उन्होंने राज्य सरकार से तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने का आग्रह किया। उनकी मांग है कि जिन छह जिलों — कांचीपुरम, रानीपेट, तिरुपत्तूर, मयिलादुथुरई, तेनकासी और पेरंबलूर — में सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां नए कॉलेज स्थापित किए जाएं। साथ ही, उन्होंने 16 मौजूदा सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 50-50 अतिरिक्त सीटें बढ़ाने की भी मांग की, ताकि सरकारी कोटे की सीटों के नुकसान की भरपाई हो सके।
इनपुट: IANS



