तमिलनाडु: इस्तीफा स्वीकार होने के बाद विधायक पद वापस पाने की कोशिश, विधानसभा सचिवालय देगा जवाब
तमिलनाडु की सियासत में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है, जहां अम्बासमुद्रम के पूर्व विधायक एसाक्की सुबैया ने अपना इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विधानसभा सचिवालय बुधवार को…
तमिलनाडु की सियासत में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है, जहां अम्बासमुद्रम के पूर्व विधायक एसाक्की सुबैया ने अपना इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध किया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, विधानसभा सचिवालय बुधवार को उनके इस अनुरोध पर अपना औपचारिक जवाब दे सकता है। यह मामला इसलिए जटिल है क्योंकि उनका इस्तीफा पहले ही स्वीकार कर लिया गया था और चुनाव आयोग उस सीट को रिक्त भी घोषित कर चुका है।
सुबैया ने 28 अगस्त को विधानसभा सचिव शांति को पत्र लिखकर कहा था कि उनके इस्तीफे पर कार्रवाई न की जाए और वह विधायक बने रहना चाहते हैं। यह घटनाक्रम हालिया विधानसभा चुनावों के बाद AIADMK में हुई बड़ी उथल-पुथल का हिस्सा है, जिसके बाद TVK ने राज्य में सरकार बनाई थी।
पूरा घटनाक्रम क्या है?
चुनाव नतीजों के बाद TVK के पास स्पष्ट बहुमत नहीं था, इसलिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विश्वास मत पेश किया। इस दौरान AIADMK के 25 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के आदेश के खिलाफ जाकर सरकार के पक्ष में मतदान किया। इनमें एसाक्की सुबैया (अम्बासमुद्रम), एस. सत्यभामा (धारापुरम), मरगथम कुमारवेल (मदुरंतकम) और जयकुमार (पेरुंदुरई) भी शामिल थे।
बाद में इन चारों विधायकों ने अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया और सत्तारूढ़ TVK में शामिल हो गए। स्पीकर जे.सी.टी. प्रभाकर ने तुरंत उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए, जिसके बाद चुनाव आयोग ने इन चारों सीटों को खाली घोषित करते हुए गजट अधिसूचना जारी कर दी।
कानूनी और संवैधानिक स्थिति
AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन विधायकों पर कार्रवाई की मांग करते हुए स्पीकर से शिकायत की थी। साथ ही उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट में भी एक मामला दायर किया है, जो अभी विचाराधीन है। विधानसभा सचिवालय के सूत्रों का कहना है कि एक बार इस्तीफा स्वीकार हो जाने और सीट को रिक्त अधिसूचित किए जाने के बाद, सुबैया का अनुरोध कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकता।
चुनाव कानून के मुताबिक, रिक्त घोषित सीट पर उपचुनाव कराना अनिवार्य है। उम्मीद है कि स्पीकर प्रभाकर मीडिया के सामने इस मामले के कानूनी और संवैधानिक पहलुओं को स्पष्ट कर सकते हैं, ताकि प्रस्तावित उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो सके।
इनपुट: IANS



