सोमवार, 17 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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त्रिपुरा: त्रिपक्षीय समझौते पर अमल नहीं हुआ तो BJP से अलग राह चुन सकती है टिपरा मोथा

त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (TMP) ने गठबंधन पर पुनर्विचार करने के संकेत दिए हैं। पार्टी सुप्रीमो प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने सोमवार को स्पष्ट किया कि…

त्रिपुरा: त्रिपक्षीय समझौते पर अमल नहीं हुआ तो BJP से अलग राह चुन सकती है टिपरा मोथा
(फोटो: IANS)

त्रिपुरा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (TMP) ने गठबंधन पर पुनर्विचार करने के संकेत दिए हैं। पार्टी सुप्रीमो प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देबबर्मा ने सोमवार को स्पष्ट किया कि यदि 2 मार्च, 2024 को हुए त्रिपक्षीय समझौते को लागू नहीं किया गया, तो उनकी पार्टी को "अलग रास्ता अपनाने" के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह बयान अगरतला में हुई पार्टी की एक विस्तृत बैठक के बाद आया, जिसमें टीएमपी के विधायक, TTAADC सदस्य और वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए थे। यह बैठक आगामी ग्राम समिति चुनावों के लिए भाजपा के साथ दिल्ली में हुई बातचीत के बेनतीजा रहने के बाद बुलाई गई थी।

समझौते का कार्यान्वयन पहली प्राथमिकता

प्रद्योत देबबर्मा ने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी के लिए पद या वित्तीय लाभ नहीं, बल्कि समझौते का कार्यान्वयन सर्वोपरि है। उन्होंने कहा, "मैं बिल्कुल स्पष्ट हूं। अगर ये (भाजपा) लोग गंभीर हैं, तो उन्हें समझौते को लागू करना चाहिए।" देबबर्मा के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर हुए ढाई साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन यह अब तक पूरा नहीं हुआ है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि समझौते को लागू करने में विफलता उनकी पार्टी को आगे की कार्रवाई तय करने के लिए मजबूर करेगी।

गठबंधन और सरकार में भागीदारी

टिपरा मोथा पार्टी, मार्च 2024 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद त्रिपुरा की भाजपा-नीत सरकार में कनिष्ठ सहयोगी के रूप में शामिल हुई थी। पार्टी के दो विधायक, अनिमेष देबबर्मा और वृषकेतु देबबर्मा, मुख्यमंत्री माणिक साहा के मंत्रिमंडल में मंत्री हैं।

देबबर्मा ने कुछ नेताओं को मंत्री पद देने जैसे सीमित राजनीतिक समाधानों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, "आप 10-15 लोगों को खुश कर सकते हैं, लेकिन 14 लाख आदिवासी लोग वहीं रहेंगे जहां वे थे।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल के चुनावों के दौरान कुछ विधायकों और एमडीसी से संपर्क कर पार्टी को कमजोर करने का प्रयास किया गया।

आगामी चुनाव और राजनीतिक समीकरण

यह राजनीतिक हलचल त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के तहत 587 ग्राम समितियों के चुनावों से ठीक पहले हो रही है, जो इस साल के अंत में होने वाले हैं। TTAADC, जिसे त्रिपुरा में विधानसभा के बाद दूसरी सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था माना जाता है, पर 2021 से टीएमपी का नियंत्रण है। 12 अप्रैल को हुए TTAADC चुनावों में, टीएमपी ने 28 में से 24 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को केवल चार सीटों से संतोष करना पड़ा था।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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