सोमवार, 17 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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गुजरात: 'सचेत' ऐप बना किसानों और मछुआरों का 'डिजिटल सुरक्षा कवच', आपदा से पहले देता है अलर्ट

गुजरात के तटीय इलाकों में रहने वाले किसानों और मछुआरों के लिए 'सचेत' मोबाइल ऐप एक बड़ी राहत बनकर उभरा है। यह ऐप चक्रवात, भारी बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की रियल-टाइम जानकारी देकर उन्हें…

गुजरात: 'सचेत' ऐप बना किसानों और मछुआरों का 'डिजिटल सुरक्षा कवच', आपदा से पहले देता है अलर्ट
(फोटो: IANS)

गुजरात के तटीय इलाकों में रहने वाले किसानों और मछुआरों के लिए 'सचेत' मोबाइल ऐप एक बड़ी राहत बनकर उभरा है। यह ऐप चक्रवात, भारी बारिश और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की रियल-टाइम जानकारी देकर उन्हें संभावित खतरों से बचाने में अहम भूमिका निभा रहा है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा विकसित यह ऐप आपदा के समय जान-माल के नुकसान को कम करने का एक प्रभावी ज़रिया बन गया है।

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समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 'सचेत' ऐप कॉमन अलर्टिंग प्रोटोकॉल (CAP) और जियो-फेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करता है। इसके माध्यम से यह चक्रवात, बिजली गिरने, बाढ़ और लू (हीटवेव) जैसी आपदाओं के बारे में सटीक और समय पर अलर्ट भेजता है, जिससे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और ज़रूरी कदम उठाने का पर्याप्त समय मिल जाता है।

किसानों और मछुआरों के लिए वरदान

इस ऐप के इस्तेमाल से आए बदलाव को स्थानीय लोग खुद बयां कर रहे हैं। वलसाड के एक किसान अंबुभाई पटेल ने बताया कि ऐप से उन्हें मौसम की अग्रिम सूचना मिल जाती है। उन्होंने कहा, "यह हमें आने वाले तूफान और बारिश के बारे में बताता है, जिससे हम समय रहते अपने खेतों से घर लौट सकते हैं। अगर किसी किसान की फसल कटाई के लिए तैयार है, तो वे उसे सुरक्षित जगह पर ले जा सकते हैं।"

इसी तरह, मछुआरे भागूभाई टंडेल ने इसे मछली पकड़ने वाले समुदाय के लिए बेहद फायदेमंद बताया। उनके अनुसार, जब भी बारिश की संभावना होती है, तो ऐप समय पर जानकारी दे देता है, जो समुद्र में जाने वालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रशासनिक व्यवस्था में भी मददगार

यह ऐप न केवल आम नागरिकों बल्कि सरकारी तंत्र के लिए भी उपयोगी साबित हुआ है। पारंपरिक माध्यमों जैसे टीवी और रेडियो की तुलना में यह अलर्ट को बहुत तेजी से और सीधे लक्षित लोगों तक पहुंचाता है। अहमदाबाद मौसम विभाग के निदेशक अशोक कुमार दास ने पुष्टि की कि इस ऐप के जरिए मौसम से जुड़े सभी अपडेट समय पर लोगों तक पहुंचाए जाते हैं।

राज्य के राहत निदेशक एस.सी. सावलिया ने बताया कि इस साल मॉनसून के दौरान अकेले अहमदाबाद में विभिन्न चेतावनी प्रणालियों के जरिए करीब 70 करोड़ संदेश भेजे गए। ये अलर्ट राज्य सरकार से लेकर पंचायत और गांव स्तर तक पहुंचाए जाते हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों को बेहतर ढंग से करने में मदद मिलती है।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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