तेलंगाना: मतदाता सूची से 73 लाख से ज़्यादा नाम हटाए गए, कांग्रेस ने चुनाव आयोग की मंशा पर उठाए सवाल
तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद 73 लाख से अधिक लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार…
तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के बाद 73 लाख से अधिक लोगों के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे राज्य में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (TPCC) के अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने चुनाव आयोग की इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना करते हुए इसे मनमाना और गरीबों को मताधिकार से वंचित करने वाला कदम बताया है।
चुनाव आयोग ने सोमवार को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की थी, जिसमें इन नामों को हटाया गया। हटाए गए लोगों को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लिकेट की श्रेणी में रखा गया है। आंकड़ों के मुताबिक, हटाए गए 73.3 लाख मतदाताओं में से लगभग 43 लाख अकेले हैदराबाद और उससे सटे रंगारेड्डी और मेडचल-मलकाजगिरी जिलों से हैं।
चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप
महेश कुमार गौड़ ने केंद्र की भाजपा सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग भी सीबीआई और ईडी की तरह भाजपा का सहयोगी संगठन बन गया है। उन्होंने सवाल किया, "आपको इस देश में जन्मे नागरिकों के वोट हटाने का अधिकार किसने दिया?" गौड़ ने यह भी पूछा कि जब 73 लाख नाम हटा दिए गए हैं, तो अलग-अलग श्रेणियों में चिह्नित 92 लाख अन्य लोग अब भी सूची में क्यों हैं।
प्रक्रिया और दस्तावेजों पर सवाल
कांग्रेस नेता ने इस प्रक्रिया में आ रही व्यवहारिक दिक्कतों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि परिसीमन और मतदान केंद्रों में हुए बदलावों के कारण कई परिवारों के पास 2002 के एसआईआर से जुड़े रिकॉर्ड मौजूद नहीं हैं। उन्होंने पूछा कि जो लोग भारत में जन्मे हैं और कई बार वोट दे चुके हैं, वे इतने पुराने दस्तावेज़ कहां से लाएंगे? गौड़ ने मांग की कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनमें से अधिकांश गरीब और प्रवासी मजदूर हैं, और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
टीपीसीसी अध्यक्ष ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समय सीमा बढ़ाने की मांग की है ताकि सभी मामलों की गहराई से पड़ताल हो सके। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर गणना फॉर्म वितरित नहीं किए, जिससे यह समस्या और बढ़ गई। कांग्रेस का कहना है कि हर पात्र मतदाता के मतदान के अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए।
इनपुट: IANS



