एन. चंद्रशेखरन को मिला टाटा संस बोर्ड का साथ, पर लिस्टिंग और अगले कार्यकाल पर नोएल टाटा का वीटो
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व को लेकर महीनों से चल रही अनिश्चितता पर विराम लग गया है। कंपनी के बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल का समर्थन करते हुए अपनी मंजूरी दे दी है…
टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व को लेकर महीनों से चल रही अनिश्चितता पर विराम लग गया है। कंपनी के बोर्ड ने चंद्रशेखरन के अगले पांच साल के कार्यकाल का समर्थन करते हुए अपनी मंजूरी दे दी है। साथ ही, बोर्ड ने कंपनी की लिस्टिंग के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दिखा दी है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में लिया गया।
हालांकि, इन प्रस्तावों पर सर्वसम्मति नहीं बन सकी। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इन दोनों ही प्रस्तावों का विरोध किया। ट्रस्ट की ओर से बोर्ड में मिले वीटो अधिकार का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार और कंपनी की लिस्टिंग, दोनों को रोकने की कोशिश की।
नेतृत्व पर फैसला और नोएल टाटा का विरोध
एन. चंद्रशेखरन फरवरी 2017 से टाटा संस का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें 2022 में दूसरे पांच साल के कार्यकाल के लिए फिर से नियुक्त किया गया था, जो 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होगा। इस साल की शुरुआत में एयर इंडिया और टाटा डिजिटल जैसे व्यवसायों के प्रदर्शन और पूंजी आवंटन को लेकर नोएल टाटा ने चिंताएं जताई थीं, जिसके बाद तीसरे कार्यकाल पर बातचीत रुक गई थी। इससे पहले अगस्त में, चंद्रशेखरन ने यह भी संकेत दिया था कि वह अगला कार्यकाल नहीं चाहते और अपने इस फैसले से बोर्ड को अवगत करा चुके हैं।
एक पूर्व बयान में चंद्रशेखरन ने कहा था, "मैंने टाटा समूह में अपने पेशेवर जीवन के 40 साल पूरे कर लिए हैं।" उन्होंने यह भी कहा, "मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान में योगदान देने के बेहद संतोषजनक अवसर के लिए आभारी हूं। पिछले दशक में टाटा संस का नेतृत्व करना एक बड़ा सम्मान और एक बड़ी जिम्मेदारी रही है।"
लिस्टिंग की आरबीआई अनिवार्यता
टाटा संस को लिस्ट कराने का यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक महत्वपूर्ण निर्देश के कुछ हफ्तों बाद आया है। आरबीआई ने टाटा संस को 'अपर-लेयर नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी' (Upper-Layer NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया था। इस वर्गीकरण के तहत, कंपनी के लिए 2022 में जारी नियमों के अनुसार तीन साल के भीतर स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट होना अनिवार्य था।
इनपुट: IANS



