मंगलवार, 1 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु ने डेल्टा सिंचाई के लिए मेट्टूर बांध से पानी छोड़ा, किसानों को मिलेगी राहत

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के बीच, राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को मेट्टूर स्थित स्टेनली जलाशय से डेल्टा क्षेत्रों की सिंचाई के लिए पानी छोड़…

कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु ने डेल्टा सिंचाई के लिए मेट्टूर बांध से पानी छोड़ा, किसानों को मिलेगी राहत
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के बीच, राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को मेट्टूर स्थित स्टेनली जलाशय से डेल्टा क्षेत्रों की सिंचाई के लिए पानी छोड़ दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम कावेरी डेल्टा के उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपनी फसलों की बुआई के लिए पानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।

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कम बारिश और जलाशय में अपर्याप्त जल भंडारण के कारण इस साल पानी छोड़ने में लगभग तीन महीने की देरी हुई। सामान्य तौर पर, 'कुरुवई' (कम अवधि वाली धान की फसल) के लिए मेट्टूर बांध से पानी हर साल 12 जून को छोड़ा जाता है। मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद सी. जोसेफ विजय का यह पहला मेट्टूर दौरा था।

45 दिनों तक मिलेगा पानी

तमिलनाडु सरकार की योजना जलाशय में पानी की आवक और उपलब्धता को देखते हुए 1 सितंबर से अगले 45 दिनों तक पानी छोड़ने की है। इस फैसले से डेल्टा जिलों की कृषि भूमि को लाभ मिलने की उम्मीद है, जहाँ सिंचाई कावेरी के पानी पर ही निर्भर है। यह कदम किसानों के सामने खेती के मौसम को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच उठाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में जारी है सुनवाई

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच कावेरी जल को लेकर कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। सोमवार को, तमिलनाडु ने कर्नाटक द्वारा छोड़े जाने वाले पानी की कमी को पूरा करने का निर्देश देने की मांग की थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक के लिए टाल दी।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने दोनों राज्यों को अगली सुनवाई से पहले संबंधित घटनाक्रमों को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है। तमिलनाडु के वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने अदालत में कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बावजूद कर्नाटक पानी की कमी को पूरा करने में विफल रहा है। वहीं, कर्नाटक ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि वह तय मात्रा से अधिक पानी छोड़ रहा है। कर्नाटक के वकील श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि 30 अगस्त को 9,000 क्यूसेक की आवश्यकता के मुकाबले 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जो बाद में 11,000 क्यूसेक से अधिक हो गया।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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