मंगलवार, 1 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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झारखंड में बारिश का कहर: नदियाँ उफान पर, कई जिलों में बाढ़ के हालात, पुल और सड़कें बहीं

झारखंड के कई जिले पिछले पाँच दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण बेहाल हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा और खरकई समेत कई प्रमुख नदियाँ खतरे के…

झारखंड में बारिश का कहर: नदियाँ उफान पर, कई जिलों में बाढ़ के हालात, पुल और सड़कें बहीं
(फोटो: IANS)

झारखंड के कई जिले पिछले पाँच दिनों से जारी मूसलाधार बारिश के कारण बेहाल हैं, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा और खरकई समेत कई प्रमुख नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे साहिबगंज, लातेहार, गढ़वा और पूर्वी सिंहभूम जैसे जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, मौसम केंद्र रांची ने 1 सितंबर को राज्य के दस जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, जहाँ भारी बारिश की आशंका जताई गई है।

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बाढ़ और तेज बहाव के कारण राज्य का बुनियादी ढाँचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। लातेहार जिले में राजदंडा नदी पर बना लगभग 55 साल पुराना पुल ढह गया, जिससे महुआडांड़, गारू, लातेहार और पलामू मार्ग पर यातायात ठप हो गया है और करीब 10 हजार की आबादी का संपर्क टूट गया है। इसी तरह, गढ़वा में टुकवा नदी और रांची के तिगरा में हाल ही में बना एक पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है।

नदियों का बढ़ता जलस्तर और राहत कार्य

कई नदियाँ अपने खतरनाक स्तर पर बह रही हैं। साहिबगंज में गंगा नदी खतरे के निशान से 0.46 मीटर ऊपर 27.71 मीटर पर है, जबकि सरायकेला में खरकई नदी खतरे के निशान से 2.03 मीटर ऊपर है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए बांकाबल और खरकई डैम के फाटक खोल दिए गए हैं और जमशेदपुर के आदित्यपुर व मानगो के डूब क्षेत्रों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।

प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। प्रभावित लोगों के लिए सरकारी स्कूलों में राहत शिविर बनाए गए हैं और उन्हें सूखा राशन, तिरपाल और दवाइयाँ वितरित की जा रही हैं। इसके अलावा, तटबंधों पर पशु राहत शिविर भी स्थापित किए गए हैं।

राज्य भर में तबाही का मंजर

बारिश और बाढ़ ने राज्य के कई हिस्सों में भारी नुकसान पहुँचाया है। साहिबगंज के दियारा क्षेत्र के रामनगर, चानन और सरपना जैसे गाँवों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे लोग नावों के सहारे सुरक्षित स्थानों पर जा रहे हैं। उधवा में सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है। पूर्वी सिंहभूम में, ओडिशा के रायरंगपुर डैम से पानी छोड़े जाने के बाद शंख नदी उफान पर है और बाकड़ा पुल के ऊपर करीब छह फीट पानी बह रहा है। लातेहार के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल लोध फॉल और सुग्गा बांध भी उफान पर हैं, जिसके चलते पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

इनपुट: IANS

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