IPO लाने वाली सिम्बायोटेक फार्मालैब पर 150 करोड़ से ज्यादा के कानूनी मामले, RHP में हुआ खुलासा
फार्मा कंपनी सिम्बायोटेक फार्मालैब अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लेकर आई है, लेकिन निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि कंपनी और उससे जुड़े लोग कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी…
फार्मा कंपनी सिम्बायोटेक फार्मालैब अपना इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) लेकर आई है, लेकिन निवेशकों के लिए यह जानना ज़रूरी है कि कंपनी और उससे जुड़े लोग कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) में दी गई जानकारी से पता चलता है कि अकेले कंपनी के खिलाफ ही टैक्स और सिविल से जुड़े कुल सात मामले लंबित हैं, जिनमें 150.79 करोड़ रुपए की राशि शामिल है।
कंपनी ने अपने RHP में यह भी स्वीकार किया है कि इन कानूनी मामलों में कोई भी प्रतिकूल फैसला उसकी प्रतिष्ठा, कारोबार, वित्तीय स्थिति और नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) पर बुरा असर डाल सकता है। यह IPO सोमवार को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला है और 27 अगस्त तक इसमें निवेश किया जा सकता है। कंपनी ने इस 1,757 करोड़ रुपए के IPO के लिए प्रति शेयर 938 से 988 रुपए का प्राइस बैंड तय किया है।
निदेशक, प्रमोटर और सब्सिडियरी भी मुकदमों में शामिल
सिर्फ कंपनी ही नहीं, बल्कि उसके निदेशक (Directors), प्रमोटर (Promoters) और सहायक कंपनियाँ (Subsidiaries) भी कानूनी दांव-पेंच में उलझे हुए हैं। RHP में दिए गए ब्योरे के अनुसार:
- निदेशक: प्रमोटरों को छोड़कर, कंपनी के निदेशकों के खिलाफ दो आपराधिक और 11 टैक्स से जुड़े मामले चल रहे हैं। इनमें कुल 41.2 लाख रुपए की रकम शामिल है।
- सब्सिडियरी: कंपनी की एक सब्सिडियरी के खिलाफ 36.7 लाख रुपए का एक आपराधिक मामला और एक महत्वपूर्ण सिविल मुकदमा लंबित है।
- प्रमोटर: कंपनी के प्रमोटरों के खिलाफ भी एक आपराधिक, एक टैक्स और एक अहम सिविल केस की जानकारी दी गई है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लंबित एक अहम मामला
कंपनी की एक सहायक कंपनी, नोविया फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सिविल केस लड़ रही है। इस कंपनी ने 'ड्राफ्ट पीतमपुरा मास्टर प्लान, 2035' की वैधता को चुनौती दी है। यह मामला उसकी रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के लिए अधिग्रहित जमीन से जुड़ा है। RHP के अनुसार, हाई कोर्ट ने 6 अप्रैल, 2023 और 22 अगस्त, 2023 के अपने आदेशों में संबंधित नोटिफिकेशन के अमल पर रोक लगा दी थी और यह मामला अभी भी लंबित है।
इनपुट: IANS



