मंगोलिया में ब्यूबोनिक प्लेग की पुष्टि, मार्मोट का मांस खाने से फैला संक्रमण
मंगोलिया के स्वास्थ्य अधिकारियों ने देश के पश्चिमी खोव्द प्रांत में ब्यूबोनिक प्लेग के एक मामले की पुष्टि की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय जूनोटिक रोग केंद्र (NCZD) ने…
मंगोलिया के स्वास्थ्य अधिकारियों ने देश के पश्चिमी खोव्द प्रांत में ब्यूबोनिक प्लेग के एक मामले की पुष्टि की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय जूनोटिक रोग केंद्र (NCZD) ने शुक्रवार को बताया कि अंतिम बैक्टीरियोलॉजिकल जांच में संक्रमण की पुष्टि हो गई।
संक्रमित व्यक्ति ने पड़ोसी प्रांत बायान-उल्गी के उलानखुस क्षेत्र की यात्रा के दौरान मार्मोट (एक प्रकार की जंगली गिलहरी) का मांस खाया था, जिसके बाद वह इस बीमारी की चपेट में आ गया। इस घटना के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने लोगों को मार्मोट का शिकार करने, उसका मांस खाने या उसके मृत शरीर को छूने से बचने की सख्त हिदायत दी है।
कानूनी प्रतिबंध के बावजूद अवैध शिकार जारी
हालांकि मंगोलिया में मार्मोट के शिकार पर कानूनी तौर पर पाबंदी है, फिर भी कई लोग इसे स्वादिष्ट भोजन मानकर इसका अवैध शिकार करते हैं। NCZD ने चेतावनी दी है कि ऐसी गतिविधियों से संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है, खासकर गर्मियों के महीनों में जब लोग ग्रामीण इलाकों की यात्रा करते हैं।
एजेंसी ने यह भी बताया कि मंगोलिया के कुल 21 में से 17 प्रांत वर्तमान में प्लेग प्रभावित या उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में गिने जाते हैं। पिछले साल सितंबर में भी देश में ब्यूबोनिक प्लेग के तीन मामले सामने आए थे, जिसके बाद संक्रमितों के संपर्क में आए 80 लोगों को आइसोलेट किया गया था।
क्या है ब्यूबोनिक प्लेग?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, ब्यूबोनिक प्लेग एक जीवाणु से होने वाली बीमारी है जो जंगली कृंतकों, खासकर मार्मोट जैसे जानवरों पर रहने वाले पिस्सुओं से इंसानों में फैलती है। WHO का कहना है कि अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह 24 घंटे के भीतर जानलेवा हो सकती है। हालांकि, आज एंटीबायोटिक दवाओं से इसका प्रभावी इलाज संभव है। इतिहास में प्लेग ने 14वीं शताब्दी की 'ब्लैक डेथ' जैसी कई बड़ी महामारियों को जन्म दिया था, जिसमें यूरोप में 5 करोड़ से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी।
इनपुट: IANS



