गुरूवार, 5 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक: गन्ने की कीमत पर संग्राम, किसानों का 'जेल भरो' आंदोलन, कई नेता हिरासत में

कर्नाटक में गन्ने की उचित कीमत को लेकर किसानों का आंदोलन गुरुवार को 'जेल भरो' के आह्वान के साथ और तेज हो गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार से प्रति टन 1,000 रुपये की सब्सिडी की मांग कर…

कर्नाटक: गन्ने की कीमत पर संग्राम, किसानों का 'जेल भरो' आंदोलन, कई नेता हिरासत में
(फोटो: IANS)

कर्नाटक में गन्ने की उचित कीमत को लेकर किसानों का आंदोलन गुरुवार को 'जेल भरो' के आह्वान के साथ और तेज हो गया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राज्य सरकार से प्रति टन 1,000 रुपये की सब्सिडी की मांग कर रहे किसानों ने जब बेलगावी की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया और कई प्रमुख किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया।

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यह घटनाक्रम बेलगावी शहर के बाहरी इलाके में मुक्ति मठ के पास हुआ, जहां प्रदर्शनकारी किसानों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। पुलिस ने विरोध मार्च का नेतृत्व कर रहे किसान नेता चूनप्पा पुजारी को गुरलापुरा के पास और एक अन्य प्रमुख नेता शशिकांत गुरुजी को हिरासत में ले लिया। किसान 'कैदी नंबर 5,500' लिखी टी-शर्ट पहनकर बेलगावी की हिंडालगा सेंट्रल जेल की ओर मार्च कर रहे थे।

क्या हैं किसानों की मुख्य मांगें?

किसान संगठनों की मांग है कि उन्हें गन्ने का कुल भाव 5,500 रुपये प्रति टन मिले। इसके लिए वे चाहते हैं कि चीनी फैक्ट्रियां 4,500 रुपये प्रति टन का भुगतान करें और राज्य सरकार अतिरिक्त 1,000 रुपये की सब्सिडी दे। इसके अलावा, वे केंद्र सरकार से भी एक बड़ी मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि चीनी का न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) मौजूदा 31 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 60 रुपये प्रति किलोग्राम किया जाए। अन्य मांगों में उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) में संशोधन, 14 दिनों में भुगतान और एक व्यापक चीनी नीति बनाना शामिल है।

"जेल जाने को तैयार, पर सब्सिडी मिले"

हिरासत में लिए जाने से पहले किसान नेता चूनप्पा पुजारी ने स्पष्ट किया कि वे जेल जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन सरकार को उनकी मांग माननी होगी। उन्होंने कहा, "अगर मुझे जेल भेजा जाता है तो ठीक है, लेकिन किसानों को सरकार से 1,000 रुपये की सब्सिडी मिलनी चाहिए।" पुजारी ने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 'कर्नाटक बंद' किया जाएगा और किसी भी चीनी मिल को चलने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से कैबिनेट बैठक में सब्सिडी की घोषणा करने की मांग की।

बातचीत से नहीं निकला समाधान

यह आंदोलन कई हफ्तों से चल रहा है, जिसमें पदयात्रा और हाईवे जाम जैसे विरोध प्रदर्शन शामिल हैं। इससे पहले, लोक निर्माण विभाग मंत्री सतीश जारकीहोली ने चीनी मिल मालिकों और किसानों के बीच दो दौर की बैठकें की थीं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। 26 अक्टूबर को हुई एक बैठक में सरकार ने फैक्ट्रियों से 250 रुपये प्रति टन अतिरिक्त देने का आग्रह किया था, जिसे कथित तौर पर कई मिलों ने लागू नहीं किया। अब राज्य सरकार अपनी कैबिनेट बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा करने वाली है, जबकि किसान संगठन 6 नवंबर को बेंगलुरु में एक बड़े सम्मेलन की तैयारी कर रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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