गुरूवार, 5 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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कर्नाटक: गृह लक्ष्मी योजना के बकाये पर सरकार का यू-टर्न? तेजस्वी सूर्या ने कहा- 'जेब खाली, सर्वर नहीं'

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 'गृह लक्ष्मी योजना' के तहत दो महीने की किस्तों का भुगतान न करने पर सवालों के घेरे में है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सरकार पर…

कर्नाटक: गृह लक्ष्मी योजना के बकाये पर सरकार का यू-टर्न? तेजस्वी सूर्या ने कहा- 'जेब खाली, सर्वर नहीं'
(फोटो: IANS)

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 'गृह लक्ष्मी योजना' के तहत दो महीने की किस्तों का भुगतान न करने पर सवालों के घेरे में है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने सरकार पर विरोधाभासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कहा है कि भुगतान में देरी की वजह तकनीकी नहीं, बल्कि वित्तीय संकट है।

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यह पूरा विवाद तब सामने आया जब योजना के लाभार्थियों ने बकाया किस्तों के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सरकार ने अदालत में दाखिल अपने जवाब में माना कि वित्तीय बाधाओं के कारण फरवरी और मार्च 2025 की किस्तें जारी नहीं की जा सकीं। यह सरकार के उस पिछले रुख से अलग है, जिसमें विधानसभा में तकनीकी गड़बड़ी को वजह बताया गया था।

विधानसभा बनाम हाईकोर्ट: सरकार के बदलते जवाब

बेंगलुरु दक्षिण से सांसद तेजस्वी सूर्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर सरकार के दोनों बयानों के अंतर को उजागर किया। उन्होंने लिखा, "दिसंबर 2025 में तत्कालीन मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने विधानसभा में गृह लक्ष्मी के बकाया के लिए तकनीकी गड़बड़ी को दोष दिया था। नवंबर 2026 में उनकी ही सरकार कोर्ट में वित्तीय बाधाओं का हवाला दे रही है, जो उनके बयान से मेल नहीं खाता।"

सूर्या ने तंज कसते हुए आगे कहा, "सर्वर कभी क्रैश नहीं हुए। राज्य की आर्थिक स्थिति क्रैश हुई। इस बात का और क्या सबूत चाहिए कि यह जीरो-बैलेंस, कंगाल सरकार है?" उन्होंने अपने पोस्ट के साथ हाईकोर्ट में दिए गए सरकार के जवाब की प्रति भी साझा की।

अदालत में सरकार की दलील

आर. गंगा और अन्य लाभार्थियों द्वारा दायर याचिका के जवाब में राज्य सरकार ने कहा कि गृह लक्ष्मी योजना एक कल्याणकारी कार्यक्रम है, लेकिन इसके तहत मिलने वाली सहायता को लाभार्थी कानूनी अधिकार के रूप में दावा नहीं कर सकते। सरकार ने तर्क दिया कि किसी योजना का क्रियान्वयन प्रशासनिक जरूरतों और धन की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

सरकार के मुताबिक, केवल किसी कल्याणकारी योजना का लाभार्थी होने से किसी को वित्तीय सहायता पाने का अटूट अधिकार नहीं मिल जाता, खासकर तब जब सरकार वास्तविक वित्तीय बाधाओं का सामना कर रही हो। इसी आधार पर सरकार ने अदालत से याचिका खारिज करने का अनुरोध किया है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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