गुरूवार, 5 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत में वेयरहाउसिंग की मांग बढ़ी, मैन्युफैक्चरिंग और 3PL सेक्टर बने ग्रोथ के इंजन

भारत के वेयरहाउसिंग सेक्टर ने एक बार फिर रफ़्तार पकड़ी है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) ऑपरेटरों की तरफ से बढ़ती मांग ने अहम भूमिका निभाई है। नाइट फ्रैंक इंडिया की…

भारत में वेयरहाउसिंग की मांग बढ़ी, मैन्युफैक्चरिंग और 3PL सेक्टर बने ग्रोथ के इंजन
(फोटो: IANS)

भारत के वेयरहाउसिंग सेक्टर ने एक बार फिर रफ़्तार पकड़ी है, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स (3PL) ऑपरेटरों की तरफ से बढ़ती मांग ने अहम भूमिका निभाई है। नाइट फ्रैंक इंडिया की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में देश के आठ प्रमुख बाज़ारों में वेयरहाउसिंग स्पेस की लीजिंग यानी किराए पर लेने की गतिविधि पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 12% बढ़कर 1.91 करोड़ वर्ग फुट तक पहुंच गई।

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यह बढ़ोतरी अप्रैल-जून तिमाही की सुस्ती के बाद देखने को मिली है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी रिपोर्ट में इस उछाल के पीछे कई कारण बताए गए हैं, जिनमें विनिर्माण गतिविधियों में तेज़ी, लॉजिस्टिक्स ऑपरेशंस का बढ़ता आउटसोर्सिंग चलन और त्योहारी सीज़न से पहले कंपनियों द्वारा स्टॉक बढ़ाना शामिल है। रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और तेल व माल ढुलाई की ऊंची लागतों के बावजूद सेक्टर ने मज़बूत वृद्धि दर्ज की है।

किस सेक्टर से आई कितनी मांग?

इस तिमाही में वेयरहाउसिंग की कुल मांग में सबसे बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और 3PL ऑपरेटरों का रहा, जिनकी संयुक्त हिस्सेदारी 76% थी। ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इलेक्ट्रिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों की मांग के कारण मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वेयरहाउसिंग लीजिंग में सालाना आधार पर 11% की वृद्धि हुई।

वहीं, 3PL ऑपरेटरों द्वारा वेयरहाउसिंग स्पेस लेने में 27% की ज़बरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसकी वजह यह है कि कंपनियां परिचालन लागत के उतार-चढ़ाव से बचने और अपने कामकाज में अधिक लचीलापन लाने के लिए वेयरहाउसिंग और डिस्ट्रिब्यूशन जैसे कामों को आउटसोर्स कर रही हैं।

उपभोक्ता-केंद्रित सेक्टर भी आगे

त्योहारी सीज़न के नज़दीक आने से रिटेल और ई-कॉमर्स जैसे उपभोक्ता-केंद्रित क्षेत्रों ने भी अपने वेयरहाउसिंग नेटवर्क का विस्तार किया। ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा स्पेस लीज पर लेने में सालाना 5% की वृद्धि हुई। वहीं, दैनिक उपयोग की वस्तुओं (FMCG) और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (FMCD) की कंपनियों की मांग में क्रमशः 101% और 43% की तेज़ उछाल देखी गई।

भविष्य का नज़रिया

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, "भारत का वेयरहाउसिंग बाज़ार दो महत्वपूर्ण बदलावों से आकार ले रहा है। इनमें घरेलू विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार और विशेष लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाताओं की बढ़ती भूमिका शामिल है।" उन्होंने ज़ोर दिया कि इस क्षेत्र में विकास का अगला चरण केवल लीजिंग की मात्रा पर ही निर्भर नहीं करेगा, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और खपत केंद्रों की ज़रूरतों को पूरा करने वाले स्थानों पर गुणवत्तापूर्ण सुविधाओं की उपलब्धता भी महत्वपूर्ण होगी। बैजल के अनुसार, "उपयुक्त भूमि की उपलब्धता, समय पर मंजूरी और आधुनिक बुनियादी ढांचे में निवेश एक ऐसे वेयरहाउसिंग इकोसिस्टम के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण होंगे, जो भारत की बदलती आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरतों को पूरा कर सके।"

इनपुट: IANS

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