भारत के व्यावसायिक प्रतिष्ठान और उद्योग अपनाएंगे सौर-पवन ऊर्जा, 2032 तक क्षमता 100 गीगावाट के पार जाने की उम्मीद
भारत में व्यावसायिक और औद्योगिक (C&I) क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता अगले आठ सालों में तीन गुना से भी ज़्यादा बढ़ने का अनुमान है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षमता 2025 के 32 गीगावाट से बढ़कर 2032
भारत में व्यावसायिक और औद्योगिक (C&I) क्षेत्र में नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता अगले आठ सालों में तीन गुना से भी ज़्यादा बढ़ने का अनुमान है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, यह क्षमता 2025 के 32 गीगावाट से बढ़कर 2032 तक 100 गीगावाट तक पहुंच सकती है। समाचार एजेंसी IANS की इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इसी अवधि में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (ESS) की स्थापित क्षमता में 10 गुना से अधिक की भारी वृद्धि होगी, जो 31 गीगावाट-घंटा तक पहुँच जाएगी।
इस तेज उछाल के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण बताए गए हैं—कंपनियों द्वारा अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करने (डीकार्बोनाइजेशन) के लक्ष्य, लगातार बढ़ते ग्रिड टैरिफ, और ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता की बढ़ती ज़रूरत। साथ ही, कई राज्यों के स्तर पर नियामक संस्थाओं द्वारा लाए जा रहे नए नियम भी स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की गति को तेज कर रहे हैं।
किन राज्यों की नीतियां दे रहीं बढ़ावा?
रिपोर्ट में कुछ राज्यों की नीतियों को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। महाराष्ट्र की नई नवीकरणीय ऊर्जा और स्टोरेज नीति के तहत 100 किलोवाट से अधिक के हर नए रिन्यूएबल प्रोजेक्ट के साथ स्टोरेज की सुविधा लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, राज्य की बिजली वितरण कंपनियों को भी वित्त वर्ष 2035-36 तक अपनी कुल बिजली का 10% हिस्सा स्टोरेज से लेना होगा। वहीं, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और राजस्थान जैसे राज्य भी लागत-आधारित बैंकिंग, सेटलमेंट नीतियां और ट्रांसमिशन शुल्क में छूट जैसे उपायों से इसे गति दे रहे हैं।
इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ेगी मांग
इस बदलाव में औद्योगिक इकाइयां सबसे आगे रहेंगी और कुल एनर्जी स्टोरेज सिस्टम इंस्टॉलेशन में उनकी आधी से ज्यादा हिस्सेदारी होने की उम्मीद है। हालांकि, सबसे तेज वृद्धि डेटा सेंटर और अस्पताल, मेट्रो स्टेशन, रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डे जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों में देखने को मिलेगी। इंडिया एनर्जी स्टोरेज एलायंस (IESA) के अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा, "हमारी नई रिसर्च से पता चलता है कि भारत का C&I एनर्जी स्टोरेज मार्केट न सिर्फ बढ़ रहा है, बल्कि एक नए दौर की ओर तेजी से बढ़ रहा है। राज्यों की दूरदर्शी नीतियों और कॉर्पोरेट जगत से बढ़ती मांग के कारण, स्टोरेज अब सिर्फ बैकअप नहीं, बल्कि मजबूती और डीकार्बोनाइजेशन के लिए एक अहम रणनीतिक टूल बनता जा रहा है।"
आगामी इवेंट में होगी विस्तृत चर्चा
यह रिपोर्ट नई दिल्ली के यशोभूमि (IICC) में 8 से 10 जुलाई के बीच होने वाले 'इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक' (IESW) 2026 में जारी की जाएगी। इस कार्यक्रम में 200 से अधिक प्रदर्शक और 10,000 से ज़्यादा उद्योग जगत के लीडर शामिल होंगे। IESW में भारी उद्योग, खान, बिजली और पर्यावरण जैसे अहम मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे, जहाँ नीतिगत बाधाओं, राज्यों के सुधारों और उद्योग की जरूरतों पर चर्चा होगी, ताकि भारत के स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव को गति दी जा सके।
इनपुट: IANS



