गुरूवार, 23 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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IndiGo को पहली तिमाही में 382 करोड़ का घाटा, महंगे ईंधन और फ्लीट में कमी का असर

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बड़ा झटका लगा है। कंपनी को स्टैंडअलोन आधार पर 382 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह नतीजा…

IndiGo को पहली तिमाही में 382 करोड़ का घाटा, महंगे ईंधन और फ्लीट में कमी का असर
(फोटो: IANS)

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बड़ा झटका लगा है। कंपनी को स्टैंडअलोन आधार पर 382 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, यह नतीजा पिछले साल की समान अवधि के बिल्कुल विपरीत है, जब एयरलाइन ने 2,161 करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया था। कंसोलिडेटेड यानी एकीकृत आधार पर भी कंपनी को 238 करोड़ रुपए का घाटा हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में उसे 2,176 करोड़ रुपए का फायदा हुआ था।

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कंपनी के नतीजों पर बढ़ते खर्च का सीधा असर दिखा है, जिसकी सबसे बड़ी वजह अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते ईंधन की कीमतों में हुई बढ़ोतरी है। अप्रैल से जून के बीच कंपनी की कुल आय 18.9% बढ़कर 25,614.1 करोड़ रुपए हो गई, जो पिछले साल 21,542.6 करोड़ रुपए थी।

क्यों बढ़ा एयरलाइन का घाटा?

आय बढ़ने के बावजूद इंडिगो मुनाफे से फिसलकर घाटे में चली गई, क्योंकि इस दौरान उसके खर्चों में भारी उछाल आया। एयरलाइन का कुल खर्च 34.4% बढ़कर 25,852.5 करोड़ रुपए पर पहुँच गया, जो पिछले वर्ष की इसी तिमाही में 19,231.9 करोड़ रुपए था।

ईंधन का बढ़ता बोझ: खर्च में इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण विमान ईंधन (ATF) की कीमतों में आया उछाल है। आँकड़ों के मुताबिक, ईंधन पर कंपनी का खर्च सालाना आधार पर 85.7% बढ़कर 10,832.9 करोड़ रुपए हो गया, जबकि पिछले साल यह 5,832.6 करोड़ रुपए था।

मुनाफे और फ्लीट पर असर

बढ़ते खर्च का असर कंपनी की परिचालन आय (EBITDAR) और मार्जिन पर भी पड़ा। इंडिगो का EBITDAR सालाना आधार पर 33.2% घटकर 3,832.5 करोड़ रुपए रह गया, जो एक साल पहले 5,738.6 करोड़ रुपए था। वहीं, EBITDAR मार्जिन 28.8% से घटकर 16.5% पर आ गया।

इसके अलावा, तिमाही के दौरान कंपनी के बेड़े में विमानों की संख्या में भी कमी आई है। 30 जून, 2026 तक इंडिगो के फ्लीट में 432 विमान थे, जबकि 31 मार्च, 2026 को यह संख्या 441 थी। विमानों की यह कमी मुख्य रूप से डैम्प लीज (गीले पट्टे) पर लिए गए विमानों की संख्या 20 से घटकर 7 हो जाने के कारण हुई।

इनपुट: IANS

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