IPO लाने की तैयारी में जुटी Juniper Green Energy, कंपनी और प्रमोटरों पर करोड़ों के कानूनी मामले
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी लिमिटेड जल्द ही अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी में है। हालांकि, आईपीओ से पहले कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी)…
रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की कंपनी जूनिपर ग्रीन एनर्जी लिमिटेड जल्द ही अपना आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने की तैयारी में है। हालांकि, आईपीओ से पहले कंपनी ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास दायर अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) में कंपनी, उसकी सहायक इकाइयों और शीर्ष प्रबंधन से जुड़े कई लंबित कानूनी मामलों का खुलासा किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इन मामलों में सिविल, आपराधिक और टैक्स से जुड़े विवाद शामिल हैं, जिनकी कुल राशि करोड़ों में है।
कंपनी ने दस्तावेज़ में बताया है कि उसके सामान्य कारोबारी गतिविधियों के दौरान विभिन्न कानूनी विवाद, दावे और मुकदमे चलते रहते हैं, जो अलग-अलग अदालतों, न्यायाधिकरणों और वैधानिक प्राधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। इन मामलों के नतीजों का कंपनी के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
कंपनी और सहायक इकाइयों पर कितना बोझ?
डीआरएचपी में दी गई जानकारी के मुताबिक, जूनिपर ग्रीन एनर्जी पर सीधे तौर पर 10.44 करोड़ रुपये का एक महत्वपूर्ण सिविल मुकदमा चल रहा है। इसके अलावा, कंपनी 37.1 लाख रुपये के 6 टैक्स मामलों का भी सामना कर रही है।
हालांकि, कानूनी मामलों का बड़ा हिस्सा कंपनी की सहायक कंपनियों से जुड़ा है। इन सहायक कंपनियों पर 74.90 करोड़ रुपये से अधिक के आपराधिक और सिविल मामले लंबित हैं। इनमें 70.72 करोड़ रुपये के दो बड़े सिविल मुकदमे और दो आपराधिक मामले शामिल हैं। साथ ही, 4.23 करोड़ रुपये की कुल राशि वाले एक अन्य आपराधिक मामले, एक नियामक कार्रवाई और दो अन्य सिविल मुकदमों का भी जिक्र है।
प्रमोटर और निदेशक भी विवादों में
कंपनी के प्रमोटरों के खिलाफ 19.5 लाख रुपये का एक आपराधिक मामला लंबित है। इसके अलावा, एक निदेशक द्वारा शुरू किया गया एक आपराधिक मामला और एक अन्य निदेशक के खिलाफ भी 19.5 लाख रुपये का एक आपराधिक मामला चल रहा है। कंपनी के प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों द्वारा भी दो आपराधिक मामले शुरू किए गए हैं, हालांकि उनकी वित्तीय राशि का खुलासा नहीं किया गया है।
कारोबार पर पड़ सकता है असर
जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने अपने डीआरएचपी में यह चेतावनी भी दी है कि अगर इन कानूनी मामलों में फैसला कंपनी के खिलाफ आता है, तो इसका गहरा असर पड़ सकता है। कंपनी के मुताबिक, प्रतिकूल फैसले, भारी हर्जाना, अदालती रोक या परियोजनाओं के परमिट रद्द होने की स्थिति में उसके कारोबार, नकदी प्रवाह, वित्तीय स्थिति और परिचालन परिणामों पर "महत्वपूर्ण प्रतिकूल प्रभाव" पड़ सकता है। मामलों के समझौते भी कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
इनपुट: IANS



