महाराष्ट्र में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू, विपक्ष ने सांप्रदायिक अशांति की आशंका जताई
महाराष्ट्र, जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कड़ा कानून बनाने वाला देश का 13वां राज्य बन गया है। राज्य सरकार ने 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को आधिकारिक तौर पर अधिसूचि…
महाराष्ट्र, जबरन या धोखे से धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कड़ा कानून बनाने वाला देश का 13वां राज्य बन गया है। राज्य सरकार ने 'महाराष्ट्र धर्म की स्वतंत्रता अधिनियम, 2026' को आधिकारिक तौर पर अधिसूचित कर दिया है, जो 28 अगस्त से पूरे प्रदेश में प्रभावी होगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस कानून को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई है।
राज्य के गृह विभाग ने कार्यकारी मंजूरी मिलने के बाद 17 अगस्त को इस कानून का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया था। जहां सत्ताधारी महायुति सरकार इसे धर्म के नाम पर गुमराह और प्रताड़ित होने वाले लोगों के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस ने इसका कड़ा विरोध किया है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
विपक्षी दलों का तर्क है कि मौजूदा कानून पहले से ही नागरिकों को अपनी मर्जी से धर्म चुनने की पूरी आजादी देते हैं और इस नए अधिनियम से सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है। सपा नेता एसटी हसन ने इस कानून को बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए कहा, "अगर कोई बालिग पुरुष या महिला अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है तो कानून इसकी पूरी इजाजत देता है।" उन्होंने कहा कि दबाव या लालच से किया गया धर्मांतरण वैसे भी गलत है और बाद में रद्द कर दिया जाता है। हसन ने चिंता जताते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि यह कानून काम करेगा। इससे सांप्रदायिक सद्भाव और बिगड़ेगा।"
इसी तरह, कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने सवाल किया, "लोग चाहें तो धर्म बदल सकते हैं, मुस्लिम लड़कियां हिंदू पुरुषों से शादी भी करती हैं।" उन्होंने जोर देकर कहा कि "महाराष्ट्र सरकार नई पीढ़ी को धर्म के नाम पर बांध नहीं सकती।" कांग्रेस के एक अन्य नेता सुरेंद्र राजपूत ने कानून लागू करने से पहले इस पर व्यापक चर्चा की मांग की है।
सरकार और सत्ता पक्ष का तर्क
दूसरी ओर, सत्ता पक्ष ने इस कानून का पुरजोर बचाव किया है। शिवसेना की प्रवक्ता शायना एनसी ने IANS से कहा कि यह कानून किसी विशेष समुदाय या धर्म के खिलाफ नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया, "लोगों को धर्म के नाम पर गुमराह नहीं किया जाना चाहिए और न ही फंसाया जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी समुदाय के हों।" उन्होंने बताया कि संभावित धर्मांतरण के कई मामले सामने आने के बाद यह राजपत्र जारी किया गया है।
भाजपा विधायक राम कदम ने भी इस कदम का समर्थन करते हुए कहा, "किसी का धर्म जबरदस्ती बदलने, या लालच देकर या प्रलोभन देकर धर्म बदलने की कोई भी कोशिश पूरी तरह गलत है।" उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र संतों की धरती है और यहां किसी को भी लालच या किसी अन्य कारण से जबरन धर्म परिवर्तन कराने का अधिकार नहीं है।
इनपुट: IANS



