सैन्य कमान पर अमेरिका से बातचीत जारी, 'बिना नई शर्तों' के वापसी चाहता है दक्षिण कोरिया
दक्षिण कोरिया अपने युद्धकालीन सैन्य अभियानों का नियंत्रण (OPCON) अमेरिका से वापस लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन वह इसमें कोई अतिरिक्त शर्त नहीं चाहता। समाचार एजेंसी IANS की एक…
दक्षिण कोरिया अपने युद्धकालीन सैन्य अभियानों का नियंत्रण (OPCON) अमेरिका से वापस लेने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहता है, लेकिन वह इसमें कोई अतिरिक्त शर्त नहीं चाहता। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा मंत्री पद के उम्मीदवार कांग शिन-चुल ने कहा है कि सियोल और वॉशिंगटन के बीच बातचीत "नो एडेड कंडीशंस" यानी बिना किसी नई शर्त के सिद्धांत पर ही आगे बढ़ रही है।
शुक्रवार को एक संसदीय पुष्टि सुनवाई से पहले दिए गए लिखित जवाब में कांग ने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा मंत्रालय इसी सिद्धांत के आधार पर अमेरिका के साथ द्विपक्षीय परामर्श कर रहा है। गौरतलब है कि ली जे-म्युंग की सरकार 2030 में अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले, या संभवतः अगले साल ही, यह कमान अपने हाथ में लेने की इच्छुक है।
कमान हस्तांतरण का इतिहास और शर्तें
दक्षिण कोरिया ने 1994 में शांतिकाल के दौरान सैन्य अभियानों का नियंत्रण तो वापस ले लिया था, लेकिन युद्ध की स्थिति में कमान अब भी अमेरिका के पास है। मूल रूप से दोनों देशों ने 2007 में यह हस्तांतरण अप्रैल 2012 तक पूरा करने पर सहमति जताई थी, लेकिन उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से उत्पन्न खतरों के कारण यह प्रक्रिया कई बार स्थगित हुई।
इसके बाद अक्टूबर 2014 में, दोनों पक्षों ने एक "शर्तों पर आधारित" योजना अपनाई। इसके तहत दक्षिण कोरिया को तीन प्रमुख शर्तें पूरी करनी थीं: भविष्य की संयुक्त कमान का नेतृत्व करने की क्षमता, उत्तर कोरिया के खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने की काबिलियत, और एक अनुकूल क्षेत्रीय सुरक्षा माहौल सुनिश्चित करना।
समयसीमा पर मतभेद और आगे की राह
हालांकि, इस हस्तांतरण की कोई निश्चित समयसीमा तय करने को लेकर सियोल और वॉशिंगटन के बीच मतभेद बने हुए हैं। अमेरिकी सेना के कोरिया कमांडर जनरल जेवियर ब्रुनसन कह चुके हैं कि सैन्य तैयारी पर राजनीतिक जल्दबाजी हावी नहीं होनी चाहिए। कांग शिन-चुल ने इन मतभेदों को कमतर आंकते हुए कहा कि दोनों पक्ष उच्च-स्तरीय चैनलों के माध्यम से लगातार संपर्क में हैं।
पूर्व में दक्षिण कोरिया-अमेरिका संयुक्त बल कमान (CFC) के उप कमांडर रह चुके कांग ने यह भी स्पष्ट किया कि दक्षिण कोरिया का दुश्मन उत्तर कोरियाई शासन और उसकी सेना है। उन्होंने कहा, "जो भी दक्षिण कोरिया की सुरक्षा, नागरिकों और संपत्ति के लिए खतरा पैदा करेगा, उसे दुश्मन माना जाएगा।" उन्होंने भरोसा जताया कि तत्काल कमान हस्तांतरण की स्थिति में भी दक्षिण कोरिया अपनी रक्षा करने में सक्षम है, बशर्ते दोनों देशों के गठबंधन में आपसी विश्वास बना रहे।
इनपुट: IANS



