चुनाव कानून उल्लंघन: दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल दोषी करार, पार्टी पर करोड़ों लौटाने का संकट
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को एक अदालत ने 2022 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है। इस फैसले के बाद उनकी पार्टी, पीपुल पावर पार्टी (पीपीपी), पर सरकारी…
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को एक अदालत ने 2022 के राष्ट्रपति चुनाव से जुड़े नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है। इस फैसले के बाद उनकी पार्टी, पीपुल पावर पार्टी (पीपीपी), पर सरकारी खजाने से मिले चुनावी खर्च के लगभग 39.7 अरब वॉन (करीब 2.73 करोड़ डॉलर) वापस करने का दबाव बन गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने सोमवार को यून को 18 महीने की जेल की सजा सुनाई, जिसे तीन साल के लिए निलंबित कर दिया गया है।
अदालत का यह फैसला मार्च 2022 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान यून द्वारा दिए गए झूठे बयानों पर आधारित है। यून के वकीलों ने फैसले में त्रुटियों का हवाला देते हुए इसे उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कही है। यह मामला यून के खिलाफ चल रहे कई कानूनी मामलों में से एक है, जिसमें दिसंबर 2024 में मार्शल लॉ लगाने की उनकी असफल कोशिश भी शामिल है।
क्या हैं आरोप और अदालत का फैसला?
विशेष वकील मिन जूंग-की की टीम ने यून के खिलाफ दो मौकों पर झूठे बयान देने का आरोप लगाया था। पहला, दिसंबर 2021 में एक प्रेस कार्यक्रम में उन्होंने इस बात से इनकार किया था कि उन्होंने कभी एक वकील का परिचय किसी पूर्व कर अधिकारी से कराया था। दूसरा, जनवरी 2022 के एक साक्षात्कार में उन्होंने अपनी पत्नी किम केओन-ही के साथ जियोन सियोंग-बे नामक व्यक्ति से मिलने से इनकार किया था।
अदालत ने दोनों ही मामलों में यून को दोषी ठहराया। अदालत ने विशेष वकील की दलीलें स्वीकार करते हुए कहा, "यह अपराध बेहद गंभीर है, क्योंकि मतदाताओं की गहरी रुचि वाले मुद्दे पर झूठी जानकारी सार्वजनिक की गई।" विशेष वकील की टीम ने यून के लिए दो साल की जेल की सजा की मांग की थी।
पार्टी पर क्या होगा असर?
दक्षिण कोरिया के चुनाव कानून के मुताबिक, अगर किसी राष्ट्रपति उम्मीदवार को 15% से अधिक वोट मिलते हैं तो उसकी पार्टी को चुनावी खर्च की प्रतिपूर्ति की जाती है। हालांकि, अगर वही उम्मीदवार चुनाव कानून के उल्लंघन में दोषी पाया जाता है और उसे 10 लाख वॉन से अधिक का जुर्माना या जेल की सजा होती है, तो पार्टी को वह राशि लौटानी पड़ती है।
यदि ऊपरी अदालतों में भी यह फैसला बरकरार रहता है, तो पीपीपी को चुनाव आयोग से मिली 39.7 अरब वॉन की पूरी रकम वापस करनी होगी। इस मामले का अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट से अगले साल जनवरी तक आने की संभावना है, क्योंकि विशेष वकील कानून के तहत ऐसे मामलों का निपटारा एक निश्चित समय-सीमा में करना होता है।
इनपुट: IANS



