नोएडा: कंस्ट्रक्शन साइट पर इंजीनियर की मौत के 6 महीने बाद पिता ने कहा- अब न्याय की कोई उम्मीद नहीं
नोएडा के सेक्टर 150 में एक असुरक्षित निर्माण-स्थल पर 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनके पिता राजकुमार मेहता ने अब न्याय मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी
नोएडा के सेक्टर 150 में एक असुरक्षित निर्माण-स्थल पर 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के छह महीने बीत चुके हैं, लेकिन उनके पिता राजकुमार मेहता ने अब न्याय मिलने की उम्मीद लगभग छोड़ दी है। उनका कहना है कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट आने के बावजूद जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे उन्हें गहरा दुख और निराशा हुई है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, राजकुमार मेहता ने जांच के बाद हुई घटनाओं पर हताशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि वह अकेले कानूनी लड़ाई लड़ने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए अदालत का दरवाजा नहीं खटखटाएंगे। हालांकि, उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि वह इस मामले में जवाबदेही तय करे, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।
क्या हुआ था 17 जनवरी की उस रात?
युवराज मेहता की मौत 17 जनवरी को घने कोहरे के दौरान हुई थी, जब उनकी SUV कार सेक्टर 150 में पानी से भरी एक खाई में जा गिरी थी। इस निर्माण-स्थल के चारों ओर कोई सुरक्षा घेरा या चेतावनी संकेत नहीं था। युवराज किसी तरह अपनी गाड़ी की छत पर चढ़ने में कामयाब हो गए और मदद के लिए पुकारते रहे, लेकिन आपातकालीन बचाव में हुई देरी के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका और आखिरकार वह डूब गए।
जांच हुई, पर कार्रवाई नहीं: पिता का दर्द
राजकुमार मेहता ने IANS को बताया कि SIT ने अपनी जांच बहुत तेजी से पूरी कर सचिव को रिपोर्ट सौंप दी थी, जिससे उन्हें न्याय की उम्मीद जगी थी। उन्होंने कहा, "हमें बहुत उम्मीद थी कि कार्रवाई की जाएगी। लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को सजा मिलते देख हमें अपने बेटे की जान जाने के मामले में कुछ मानसिक शांति मिलती।" उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआत में कुछ अधिकारियों पर जो कार्रवाई हुई भी थी, उसे बाद में वापस ले लिया गया और उन्हें बहाल कर दिया गया।
उन्होंने व्यवस्था की तीन बड़ी खामियों की ओर इशारा किया: पहला, गड्ढा खोदने वालों ने सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए थे। दूसरा, उस मोड़ पर कोई चेतावनी या ट्रैफिक साइन नहीं था। और तीसरा, 112 हेल्पलाइन पर बुलाने के बावजूद बचाव दल ने गंभीरता नहीं दिखाई और बिना लाइफ जैकेट या रस्सी के आधे रास्ते से ही लौट आया।
'सब कुछ सामान्य चल रहा है'
अपने बेटे के अंतिम पलों को याद करते हुए मेहता ने कहा, "वह डेढ़ घंटे तक संघर्ष करता रहा और मदद के लिए पुकारता रहा। अगर कार्रवाई होती तो समाज में संदेश जाता, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। जिंदगी बस सामान्य रूप से चल रही है।" उन्होंने SIT जांच को कार्रवाई-विहीन रिपोर्ट करार देते हुए कहा कि ऐसी लापरवाही जारी रही तो घटनाएं होती रहेंगी। यह मामला हाल ही में एक अन्य इंजीनियर आर्यन की मौत के बाद फिर से चर्चा में आया है, जो नोएडा के सेक्टर 57 में एक नाले में गिर गए थे।
इनपुट: IANS



