रविवार, 26 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ से भीषण तबाही, हजारों पर्यटक और स्थानीय निवासी फंसे

पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में भीषण बाढ़ और ग्लेशियर पिघलने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रमुख राजमार्गों को भारी नुकसान पहुंचने के कारण कई इलाके लगातार…

गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ से भीषण तबाही, हजारों पर्यटक और स्थानीय निवासी फंसे
(फोटो: IANS)

पाकिस्तान के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में भीषण बाढ़ और ग्लेशियर पिघलने से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रमुख राजमार्गों को भारी नुकसान पहुंचने के कारण कई इलाके लगातार चौथे दिन भी बाकी देश से कटे हुए हैं। इस वजह से हजारों स्थानीय निवासी और पर्यटक अलग-अलग घाटियों में फंसे हुए हैं और राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है।

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बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को पीने के पानी, बिजली और संचार सेवाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। नगर जिले की हिस्पर घाटी में सड़क संपर्क टूटने से मरीजों और छात्रों को गंभीर परेशानियां हो रही हैं। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, खाद्य सामग्री, दवाइयों और अन्य जरूरी चीजों का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। दियामेर, अस्तोर, घिजर और अन्य जिलों से भी ऐसी ही खबरें आ रही हैं।

उच्च तापमान और ग्लेशियर का पिघलना

गिलगित-बाल्टिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के महानिदेशक अताउर रहमान काकर ने बताया कि इस आपदा का मुख्य कारण रिकॉर्ड तोड़ गर्मी है। उनके मुताबिक, 18 से 21 जुलाई के बीच क्षेत्र में तापमान सामान्य से बहुत अधिक दर्ज किया गया, जिसके चलते ग्लेशियर तेजी से पिघले और कई जगहों पर 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) की घटनाएं हुईं।

बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

पिछले हफ्ते भारी बारिश के बाद आई इस बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। 13 जुलाई को अकेले दियामेर जिले में ही छह स्थानों पर फ्लैश फ्लड की घटनाएं दर्ज की गई थीं। बाढ़ के कारण कई घर तबाह हो गए और काराकोरम हाईवे समेत कई मुख्य सड़कों को भारी क्षति पहुंची। थोरे घाटी में तो मुख्य सड़क कई जगहों पर पूरी तरह बह गई है, जिससे यातायात ठप है।

इसके अलावा, फसलें, कृषि भूमि और सार्वजनिक संपत्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। खानबरी क्षेत्र में कई घर और बड़ी संख्या में मवेशी बाढ़ के पानी में बह गए। बिजली की ट्रांसमिशन लाइनों को नुकसान पहुंचने और घरों में मलबा घुस जाने से हजारों लोग मुश्किल में हैं। अस्तोर घाटी के निवासियों ने राहत कार्यों की धीमी गति पर चिंता जताते हुए कहा है कि उनका इलाका पिछले तीन दिनों से पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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