डेरिवेटिव्स एक्सपायरी: क्लोजिंग प्राइस तय करने के नियम की समीक्षा कर रहा है सेबी, शुरुआती दिक्कतें दूर हुईं
शेयर बाज़ार नियामक सेबी डेरिवेटिव्स अनुबंधों के लिए एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग प्राइस तय करने की अपनी व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक…
शेयर बाज़ार नियामक सेबी डेरिवेटिव्स अनुबंधों के लिए एक्सपायरी के दिन क्लोजिंग प्राइस तय करने की अपनी व्यवस्था की समीक्षा कर रहा है। सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने मुंबई में आयोजित 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' में यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने स्वीकार किया कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) नामक इस प्रणाली को लागू करने के शुरुआती दौर में तरलता यानी लिक्विडिटी से जुड़ी कुछ चुनौतियां सामने आई थीं।
हालांकि, पांडे ने स्पष्ट किया कि इस व्यवस्था को वापस लेने का कोई विचार नहीं है और समय के साथ यह अधिक सुचारु रूप से काम करने लगी है। उन्होंने कहा, "शुरुआत में लिक्विडिटी एक चुनौती थी, लेकिन समय के साथ बाजार में लिक्विडिटी का निर्माण होता है और व्यवस्था अधिक स्थिर हो जाती है।" सेबी प्रमुख के अनुसार, बाज़ार के भागीदारों से भी इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है।
कामयाबी का सबूत और भविष्य की योजना
सेबी प्रमुख ने बताया कि इस प्रणाली की प्रभावशीलता का एक बड़ा प्रमाण हाल ही में देखने को मिला, जब वैश्विक सूचकांक प्रदाता MSCI ने भी CAS फ्रेमवर्क के तहत अपने सूचकांक का पुनर्संतुलन (इंडेक्स रीबैलेंसिंग) सफलतापूर्वक पूरा किया। अब नियामक मौजूदा पद्धति की समीक्षा कर इसमें ज़रूरी बदलावों पर काम कर रहा है।
वित्तीय बाज़ार में AI के लिए सीमाएं ज़रूरी
अपने संबोधन में तुहिन कांत पांडे ने वित्तीय बाज़ारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर भी बात की। उन्होंने विशेष रूप से 'एजेंटिक एआई' प्रणालियों का जिक्र करते हुए कहा कि नियामकों और बाज़ार के भागीदारों को मिलकर इसके उपयोग के लिए स्पष्ट सीमाएं और नियम तय करने होंगे।
उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि यह तय करना होगा कि AI को किस तरह की जानकारी तक पहुंच मिलेगी, उसकी स्वायत्तता का स्तर क्या होगा, और उसकी निर्णय प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होगी। पांडे ने कहा कि उत्पादन स्तर पर इस्तेमाल होने वाली हर AI प्रणाली में ऑडिट योग्य रिकॉर्ड और बदलावों का लॉग होना चाहिए ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा, "तेजी से बढ़ना और सुरक्षित तरीके से बढ़ना परस्पर विरोधी लक्ष्य नहीं हैं।" उनके मुताबिक, किसी भी बाज़ार की स्थायी प्रगति तभी संभव है जब नवाचार के साथ निवेशकों का विश्वास भी बना रहे।
इनपुट: IANS



