शनिवार, 1 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

ज़ी एंटरटेनमेंट: बिना मंजूरी गिरवी रखी ज़मीन, सेबी ने सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका पर लगाया एक साल का बैन

ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) की एक कीमती ज़मीन को एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के कर्ज के लिए बिना ज़रूरी मंजूरी के गिरवी रखने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। समाचार एजेंसी IANS के…

ज़ी एंटरटेनमेंट: बिना मंजूरी गिरवी रखी ज़मीन, सेबी ने सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका पर लगाया एक साल का बैन
(फोटो: IANS)

ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) की एक कीमती ज़मीन को एस्सेल ग्रुप की कंपनियों के कर्ज के लिए बिना ज़रूरी मंजूरी के गिरवी रखने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पूंजी बाजार नियामक सेबी ने कंपनी के शीर्ष अधिकारियों, सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका, पर एक साल के लिए प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, ज़ी एंटरटेनमेंट पर भी दो महीने का प्रतिबंध लगाया गया है।

विज्ञापन

यह पूरा मामला कंपनी की हैदराबाद स्थित ज़मीन से जुड़ा है, जिसके मूल दस्तावेज़ एस्सेल ग्रुप की चार कंपनियों द्वारा लिए गए 726 करोड़ रुपए के कर्ज के लिए इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (IHFL) के पास जमा कराए गए थे। सेबी ने अपनी जांच में पाया कि यह सब बिना ऑडिट कमेटी, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स या शेयरधारकों की पूर्व स्वीकृति के किया गया।

जुर्माना और नियमों का उल्लंघन

सेबी ने प्रतिबंध के अलावा तीनों पर कुल 1.48 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसमें सुभाष चंद्रा पर 60 लाख रुपए, पुनीत गोयनका पर 58 लाख रुपए और ज़ी एंटरटेनमेंट (ZEEL) पर 30 लाख रुपए का जुर्माना शामिल है। सभी संबंधित पक्षों को यह राशि 45 दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है।

नियामक के मुताबिक, इस कार्रवाई का आधार लिस्टिंग ऑब्लिगेशंस एंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट्स (LODR) रेगुलेशंस, 2015 और फ्रॉड से जुड़े नियमों (PFUTP रेगुलेशंस, 2003) का उल्लंघन है।

कैसे सामने आया यह मामला?

इस गड़बड़ी का खुलासा सबसे पहले वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान ZEEL के वैधानिक ऑडिट में हुआ था, जब कंपनी की कुछ अचल संपत्तियों के मूल टाइटल डीड गायब मिले थे। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि दिसंबर 2016 में एस्सेल ग्रुप की कंपनियों ने IHFL से कर्ज लिया था, जिस पर चंद्रा और गोयनका परिवार का नियंत्रण था।

नवंबर 2018 में जब ये कंपनियां कर्ज के लिए ज़रूरी सुरक्षा (सिक्योरिटी) बनाए रखने में विफल रहीं, तो IHFL ने अतिरिक्त गारंटी की मांग की। इसके बाद, दिसंबर 2018 में ZEEL की हैदराबाद वाली ज़मीन के कागज़ात IHFL के पास जमा करा दिए गए। सेबी ने पाया कि यह एक संबंधित पक्ष लेनदेन (related party transaction) था, जिसके लिए नियमों के तहत मंजूरी और खुलासे अनिवार्य थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।

इनपुट: IANS

N

News4Social बिज़नेस डेस्क

News4Social बिज़नेस डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से कारोबार और अर्थव्यवस्था से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →