पंजाब विधानसभा ने मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ प्रस्ताव किया पारित, CM मान ने 'वोट चोरी' को बताया लोकतंत्र के लिए खतरा
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। शुक्रवार को विधानसभा को संबोधित करते हुए…
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की है। शुक्रवार को विधानसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) चुनाव आयोग के नाम पर मतदाता सूचियों में हेरफेर कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर पंजाब विधानसभा ने ध्वनि मत से एसआईआर के खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित कर दिया।
मुख्यमंत्री ने इस प्रक्रिया को 'धक्काशाही' करार देते हुए दावा किया कि भाजपा अपने पक्ष में वोट जुड़वा रही है और विपक्ष के वोट कटवा रही है। उन्होंने कहा, "बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव 'वोट चोरी' के जरिए जीते गए हैं।" मान ने चेतावनी दी कि देश में हालात ऐसे हो गए हैं, जहां जनता द्वारा चुनी गई सरकार ही यह तय कर रही है कि कौन वोट दे सकता है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के चारों स्तंभों पर तानाशाही का कब्जा बताया।
मतदान के अधिकार पर हमला
प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भगवंत मान ने कहा कि पंजाब ने एसआईआर की निंदा करके देश का नेतृत्व किया है। उन्होंने जोर देकर कहा, "मतदान का अधिकार किसी सरकार द्वारा दिया गया कोई उपहार नहीं है। यह लोकतांत्रिक भागीदारी की बुनियाद है।" उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक को मनमाने ढंग से इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
सीएम मान ने डॉ. बीआर अंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि यह हर नागरिक को समानता, गरिमा और राजनीतिक भागीदारी की गारंटी देता है। उन्होंने मतदाता सूची से कुछ खास वर्गों के नाम हटाए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा, "यह निर्धारित करने वाली कोई भी प्रक्रिया कि मतदान के अधिकार का प्रयोग कौन कर सकता है, पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह होनी चाहिए।"
केंद्रीय एजेंसियों पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन में भगवंत मान ने केंद्र सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जैसी एजेंसियों की आलोचना करते हुए कहा कि संवैधानिक और जांच संस्थानों को राजनीतिक दबाव के बिना स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि विधानसभा क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद ही आपत्तियां क्यों उठाई गईं। उन्होंने कहा, "देश के सामने सीधा सवाल है, क्या भारत एक ऐसा लोकतंत्र बना रहेगा जहां हर वोट मायने रखता है या हम एक ऐसी व्यवस्था को पनपने देंगे जिसमें सत्ता में बैठे लोग यह तय करेंगे कि किसकी आवाज सुनी जानी चाहिए?" इसके अलावा, उन्होंने पंजाब में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के प्रयासों में केंद्र सरकार द्वारा कथित तौर पर बाधाएं डालने पर भी चिंता जताई।
इनपुट: IANS



