मतदाता सूची में गड़बड़ी पर पंजाब विधानसभा चिंतित, मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए प्रस्ताव पारित
पंजाब विधानसभा ने मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने पर चिंता जताते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया है। शुक्रवार को पेश इस प्रस्ताव में 'विशेष…
पंजाब विधानसभा ने मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और पात्र नागरिकों के नाम हटाए जाने पर चिंता जताते हुए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया है। शुक्रवार को पेश इस प्रस्ताव में 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) प्रक्रिया के दौरान नागरिकों के मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए संवैधानिक सुरक्षा उपायों की मांग की गई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह प्रस्ताव वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सदन में रखा।
प्रस्ताव के ज़रिए केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक प्राधिकरणों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। साथ ही, मतदाता सूची में सामने आई गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराकर जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है। इस प्रस्ताव की प्रतियां आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजी जाएंगी।
मतदाता सूची की निष्पक्षता पर सवाल
सदन को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और ईमानदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और पात्र मतदाताओं के नाम छूट जाने की खबरों का हवाला देते हुए कहा, "लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा तभी बना रह सकता है, जब यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे।"
दिल्ली और अन्य राज्यों में पहले हुए विवादों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने उन शिकायतों पर प्रकाश डाला, जिनमें विपक्षी दलों के समर्थकों और वंचित वर्गों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप लगे थे। चीमा ने ऐसी सभी शिकायतों की गहन और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करने की कोशिश साबित होती है तो सख्त आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
“वोट का अधिकार संघर्ष से मिला हक़”
अपने संबोधन में चीमा ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए हर पात्र नागरिक के वोट के अधिकार की रक्षा को ज़रूरी बताया। उन्होंने कहा, "वोट देने का अधिकार एक ऐसा लोकतांत्रिक हक है, जिसे बहुत संघर्ष के बाद हासिल किया गया था।" उन्होंने आज़ादी से पहले के उस दौर को याद किया जब यह अधिकार कुछ खास वर्गों तक ही सीमित था और संविधान निर्माता बाबासाहेब अंबेडकर को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने ही हर वयस्क नागरिक को समान मताधिकार की नींव रखी थी।
वित्त मंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 324, 325 और 326 का महत्व बताते हुए कहा कि ये चुनाव तंत्र की निगरानी, भेदभाव रोकने और सभी वयस्क नागरिकों को वोट का अधिकार सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में इन गड़बड़ियों की जांच के लिए एक स्वतंत्र और विश्वसनीय व्यवस्था बनाने की भी मांग की।
इनपुट: IANS



