भारत का दवा उद्योग 2047 तक 450 अरब डॉलर तक पहुंचने की राह पर, गुजरात बनेगा ग्रोथ का इंजन
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग अपनी मौजूदा विकास गति को बनाए रखता है, तो यह 'अमृतकाल' यानी वर्ष 2047 तक लगभग 450 अरब डॉलर के विशाल आकार तक पहुंच सकता है। इस लक्ष्य को…
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग अपनी मौजूदा विकास गति को बनाए रखता है, तो यह 'अमृतकाल' यानी वर्ष 2047 तक लगभग 450 अरब डॉलर के विशाल आकार तक पहुंच सकता है। इस लक्ष्य को हासिल करने में गुजरात की अहम भूमिका मानी जा रही है, जिसे पहले से ही देश की 'फार्मा राजधानी' कहा जाता है। देश के कुल फार्मा उत्पादन में गुजरात अकेले करीब 30 प्रतिशत का योगदान देता है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, अहमदाबाद में आयोजित 'सीआईआई फार्मा समिट 2026' में उद्योग जगत के दिग्गजों ने इस लक्ष्य को पाने के लिए एक रोडमैप पर चर्चा की। इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IDMA) के अध्यक्ष डॉ. विरंची शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का लक्ष्य सिर्फ उत्पादन की मात्रा (वॉल्यूम) में दुनिया का नेतृत्व करना नहीं, बल्कि वैल्यू-एडेड उत्पादों और इनोवेशन में भी आगे बढ़ना है।
सहयोग और नवाचार पर जोर
सम्मेलन में इस बात पर जोर दिया गया कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उद्योग, सरकार, नियामक संस्थाओं और अकादमिक जगत के बीच मजबूत तालमेल आवश्यक है। डॉ. शाह ने कहा, "सीआईआई फार्मा समिट का उद्देश्य भी यही है कि उद्योग, नियामक संस्थाएं और अकादमिक जगत मिलकर यह तय करें कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कौन से कदम उठाए जाने चाहिए।" उन्होंने रिसर्च को बढ़ावा देने, बायोफार्मास्युटिकल्स, हाई-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग और घरेलू स्तर पर एपीआई (दवा बनाने का कच्चा माल) उत्पादन को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
पर्यावरण और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला
फार्मा उद्योग की विकास रणनीति में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को भी प्राथमिकता दी जा रही है। डॉ. शाह के मुताबिक, देश भर में बन रहे बल्क ड्रग पार्कों में अपशिष्ट जल शोधन (waste water treatment) और प्रदूषण नियंत्रण के लिए वैश्विक मानकों को अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "फार्मा उद्योग केवल लोगों की जान बचाने का काम नहीं करता, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि वह पर्यावरण प्रदूषण की वैश्विक समस्या का हिस्सा न बने।"
वहीं, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) के मुद्दे पर मेटिओरिक बायोफार्मास्युटिकल्स की डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर पूनम जी. कौशिक ने कहा कि कोविड-19 महामारी और भू-राजनीतिक संकटों ने सिखाया है कि जरूरी दवाओं की सप्लाई किसी भी हाल में रुकनी नहीं चाहिए। डॉ. शाह ने भी कहा कि अमेरिका के साथ भारत के रणनीतिक सहयोग में फार्मा सेक्टर एक प्रमुख क्षेत्र बनकर उभर रहा है और भविष्य में अमेरिका की दवा सप्लाई चेन का एक बड़ा हिस्सा भारत की ओर शिफ्ट हो सकता है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका
दवा विकास में AI की भूमिका पर पूनम कौशिक ने बताया कि यह तकनीक दवा बनाने की लंबी और महंगी प्रक्रिया को तेज और अधिक कुशल बना सकती है। उन्होंने कहा, "दवा विकास की प्रक्रिया में हजारों मानव-घंटे, वैज्ञानिक अनुसंधान, क्लीनिकल ट्रायल और विशाल संसाधन लगते हैं।" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि AI से दवाओं की कीमतों में तत्काल बड़ी कमी आएगी, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, लेकिन उद्योग इस दिशा में लगातार काम कर रहा है।
इनपुट: IANS



