भारत की समुद्री ताकत बढ़ाने की बड़ी पहल: शिपिंग कॉर्पोरेशन ने 6,858 करोड़ रुपये के वैश्विक जहाज निर्माण का टेंडर निकाला
भारत की समुद्री व्यापार क्षमता को एक बड़ी छलांग देने के लिए सरकारी नौवहन कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक जहाज निर्माण टेंडर जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS की…
भारत की समुद्री व्यापार क्षमता को एक बड़ी छलांग देने के लिए सरकारी नौवहन कंपनी शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) ने अब तक का सबसे बड़ा वैश्विक जहाज निर्माण टेंडर जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल के तहत लगभग 720 मिलियन डॉलर (करीब 6,858 करोड़ रुपये) की लागत से छह विशाल और आधुनिक कंटेनर जहाजों का निर्माण किया जाएगा। यह कदम न केवल भारत की माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि घरेलू जहाज निर्माण उद्योग को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
इस टेंडर का लक्ष्य छह ऐसे कंटेनर जहाजों का निर्माण करना है, जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 8,000 टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) होगी। टीईयू दरअसल कंटेनर जहाजों की भार क्षमता मापने की एक मानक इकाई है, जिससे यह पता चलता है कि जहाज एक बार में 20 फुट के कितने कंटेनर ले जा सकता है। इन जहाजों को विशेष रूप से मानकीकृत कंटेनरों के सुरक्षित और कुशल परिवहन के लिए डिज़ाइन किया जाएगा।
भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता
इस टेंडर की सबसे खास बात यह है कि इसमें 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा देने के लिए भारतीय शिपयार्ड्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके लिए 'राइट ऑफ फर्स्ट रिफ्यूजल' (ROFR) की व्यवस्था लागू की गई है। इसका मतलब है कि अगर कोई विदेशी शिपयार्ड सबसे कम बोली लगाता है, तो भी भारतीय शिपयार्ड को उसी कीमत पर ठेका हासिल करने का पहला मौका दिया जाएगा। यदि पहला भारतीय शिपयार्ड उस कीमत की बराबरी नहीं कर पाता, तो यह अवसर अगले योग्य भारतीय शिपयार्ड को मिलेगा।
अनुभवहीन शिपयार्ड के लिए भी मौका
एससीआई ने उन भारतीय शिपयार्ड्स के लिए भी दरवाजे खोले हैं, जिन्हें पहले बड़े कंटेनर जहाज बनाने का अनुभव नहीं है। ऐसे शिपयार्ड किसी अनुभवी विदेशी जहाज निर्माता के साथ तकनीकी साझेदारी करके इस टेंडर में हिस्सा ले सकते हैं। शर्त यह है कि विदेशी साझेदार ने पिछले 10 वर्षों में 5,000 टीईयू या उससे अधिक क्षमता वाले कम से कम दो जहाज सफलतापूर्वक बनाए हों और वे अभी भी चालू हों।
मरीन इनसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस टेंडर में शामिल छह जहाजों में से दो का ऑर्डर पक्का होगा, जबकि बाकी चार जहाजों का ऑर्डर वैकल्पिक रखा गया है। इससे एससीआई भविष्य में बाजार की स्थितियों और अपनी जरूरतों के हिसाब से बाकी जहाजों का ऑर्डर दे सकेगी। इसके अलावा, इस परियोजना में हिस्सा लेने वाले भारतीय शिपयार्ड केंद्र सरकार की 24,736 करोड़ रुपये की 'शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस स्कीम' का भी लाभ उठा सकते हैं, जिसके तहत निर्माण लागत पर 15 से 25 प्रतिशत तक की वित्तीय सहायता मिलती है।
इनपुट: IANS



