शनिवार, 8 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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मेड-टेक में भारत का बढ़ा कद, घरेलू उत्पादन और सरकारी योजनाओं ने दी नई रफ्तार: पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तेजी से बढ़ते मेडिकल टेक्नोलॉजी (मेड-टेक) क्षेत्र की प्रशंसा करते हुए कहा है कि देश इस सेक्टर में एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने इसका…

मेड-टेक में भारत का बढ़ा कद, घरेलू उत्पादन और सरकारी योजनाओं ने दी नई रफ्तार: पीएम मोदी
(फोटो: IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तेजी से बढ़ते मेडिकल टेक्नोलॉजी (मेड-टेक) क्षेत्र की प्रशंसा करते हुए कहा है कि देश इस सेक्टर में एक भरोसेमंद वैश्विक भागीदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने इसका श्रेय घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीतियों, आयात पर निर्भरता कम करने और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं को दिया है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रधानमंत्री ने यह बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के एक लेख को साझा करते हुए कही। इस लेख में भारत के मेडिकल डिवाइस निर्माण क्षेत्र में आए बदलावों और आत्मनिर्भरता की दिशा में हुई प्रगति पर प्रकाश डाला गया है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है।

घरेलू उत्पादन को सरकारी योजनाओं से मिला बल

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अपने लेख में बताया कि सरकार मेडिकल उपकरणों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। इनमें प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क की स्थापना और फार्मा-मेडटेक में अनुसंधान को बढ़ावा देने वाली पीआरआईपी (PRIP) योजना प्रमुख हैं। उन्होंने बताया कि अकेले पीएलआई योजना के तहत ही अब तक 50 से ज्यादा अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण देश में शुरू हो चुका है।

बाजार का आकार और भविष्य की संभावनाएं

जेपी नड्डा के मुताबिक, भारत का मेड-टेक बाजार वर्तमान में 15 से 16 अरब डॉलर का है और यह लगभग 12% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। आज भारत एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार है और दुनिया के शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है। इस सप्ताह आई एक अन्य रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह अनुमान लगाया गया है कि यह सेक्टर जो अभी करीब 14 अरब डॉलर का है, इस दशक के अंत तक 30 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वहीं, 2047 तक इसका आकार 250 अरब डॉलर तक होने की संभावना है।

मजबूत इकोसिस्टम बनाने पर जोर

सरकार का ध्यान सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि एक मजबूत इकोसिस्टम बनाने पर भी है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि नियामकीय ढांचे (रेगुलेटरी सिस्टम), परीक्षण सुविधाओं और क्लिनिकल डेटा के विकास को मजबूत किया जा रहा है। इसका दोहरा उद्देश्य है - मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारतीय उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के बराबर लाना। नड्डा ने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भी अपार संभावनाएं हैं, जो भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं का चेहरा बदल सकती हैं।

इनपुट: IANS

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